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खुद न बनें डॉक्टर : बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को दवा देना खतरनाक

द सीजी न्यूज डॉट कॉम

बेमेतरा / प्रदेश में तीसरी लहर की संभावित आशंका के कारण जरूरी तैयारियां शुरू हो गई है। बच्चों को संभावित तीसरी लहर से बचाने की तैयारियों पर खास जोर दिया जा रहा है। इधर, जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक मिरे ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान कई लोग हल्के-फुल्के लक्षण पर बिना डॉक्टर की सलाह के बाजार में उपलब्ध दवाओं का सेवन करना शुरू कर देते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना घातक हो सकता है। बच्चों के मामले में बिल्कुल भी जोखिम नहीं लेना चाहिए। वयस्कों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों का बच्चों पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

खुद न बनें डॉक्टर, गलती पड़ सकती है भारी

डॉ. मिरे का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान देखा गया है कि कई लोग लक्षण होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के सीधे बाजार से दवाइयां खरीदकर उनका सेवन कर रहे थे। यह खतरनाक है और जानलेवा भी हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवा नहीं खाना चाहिए। तीसरी लहर को लेकर लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि सोशल मीडिया या किसी अन्य स्रोत से अगर कुछ दवाओं के बारे में  जानकारी मिलने पर डॉक्टर की सलाह के बिना दवा नहीं लेना चाहिए।

बच्चों के इलाज और देखरेख के लिए जारी किए दिशा-निर्देश

केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कोविड-19 के उपचार में वयस्क रोगियों को दी जाने वाली आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर, डॉक्सीसाइक्लिन, एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बच्चों के इलाज में न करने की सलाह दी गई है। डॉ. मिरे ने बताया कि एम्स रायपुर और डॉ. अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय द्वारा वेबीनार के माध्यम से समय-समय पर प्रदेश भर के चिकित्सकों को मार्गदर्शन देकर बच्चों के लिए कोविड देखरेख केंद्रों के संचालन के दिशा-निर्देश तैयार किए हैं।

बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने पर गंभीर रोग से पीड़ितों को मिलेगी प्राथमिकता

सीएमएचओ डॉ. एस.के शर्मा ने बताया कि तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से अलर्ट है। गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित बच्चों को चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड केयर अस्पतालों की क्षमता में वृद्धि की जा रही है। बच्चों के लिए कोविड रोधी टीके को स्वीकृति मिलने पर टीकाकरण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी लाएगी, जो अन्य रोगों से पीड़ित हैं और जिन्हें कोविड-19 का गंभीर जोखिम है।

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