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झीरम कांड मामले में हाईकोर्ट से नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी NIA को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने NIA की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्य सरकार की एजेंसी से जांच पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट के फैसले के बाद अब झीरम घाटी की स्वतंत्र जांच हो सकती है। कोर्ट में दाखिल याचिका के संबंध में राज्य शासन के हक में फैसला आया है। बिलासपुर हाइकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आज ये फैसला सुनाया है।
इस कांड में जान गवाने वाले कांग्रेस नेता उदय मुदलियार के पुत्र जितेंद्र मुदलियार ने बस्तर में दूसरी एफआईए दर्ज कराई है। जितेंद्र मुदलियार ने एनआईए की जांच से असंतुष्ट होकर एफआईआर दर्ज कराई थी। आज इसी मामले में हाईकोर्ट में बहस के बाद कोर्ट ने कहा कि “राज्य की एजेंसी जांच करने के लिये स्वतंत्र हैं।” इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने एनआईए की याचिका को खारिज कर दिया।
ग़ौरतलब है कि, छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी कांड 26 मई 2013 को हुआ था। नक्सलियों ने कांग्रेस के बड़े 25 नेताओं की हत्या कर दी थी। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा समाप्त होने के बाद लौट रहे कांग्रेस नेताओं के काफिला पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था। इस काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं, जिस्में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत लगभग अन्य कांग्रेस नेता-सुरक्षाकर्मी मौजूद थे।
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