द सीजी न्यूज
दुर्ग / मौसम विभाग ने दुर्ग जिले में मई माह का औसत तापमान अधिक होने की संभावना जताई है। अधिकांश भागों में लू-ताप घात की स्थिति निर्मित हो सकती है। मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्य में लू-तापघात से बचने के लिए आवश्यक तैयारी और बचाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए हैं। इसमें लू के लक्षण और बचाव के तरीके बताए गए हैं।
लू के लक्षण – सिर से भारीपन और दर्द होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान अधिक हो जाने के बाद भी पसीने का न आना, अधिक प्यास और पेशाब कम आना, भूख कम लगना और बेहोश होना।
लू से बचाव के उपाय – लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी से ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी और खनिज खास तौर पर नमक की कमी है। इससे बचाव के लिए कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर ना जाएं।
- धूप से निकलने से पहले सर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बांध लें।
- पानी अधिक मात्रा में पीये और अधिक समय तक धूप में न रहें।
- गर्मी के दौरान नरम मुलायम सूती कपड़े पहनें। ताकि हवा और कपड़े पसीने को सोखते रहे।
- अधिक पसीना आने की स्थिति में ओ.आर.एस. घोल पीयें।
- चक्कर आने, उल्टी आने पर छायादार स्थान पर विश्राम करें और शीतल पेय जल या उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मठा आदि का सेवन करें।
- प्रारंभिक सलाह के लिए 104 आरोग्य सेवा केन्द्र से निःशुल्क परामर्श लें और उल्टी, सर दर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्र से जरूरी सलाह लें।
- लू लगने पर किये जाने वाला प्रारंभिक उपचार – बुखार पीड़ित व्यक्ति के सर पर ठण्डे पानी की पट्टी लगाएं, अधिक पानी व पेय पदार्थ पिलाएं। जैसे कच्चे आम का पना, जल जीरा आदि।
- पीड़ित व्यक्ति को पंखे के नीचे हवा में लिटाएं, शरीर पर ठण्डे पानी का छिड़काव करते रहें, पीड़ित व्यक्ति को यथाशीघ्र किसी नजदीकी चिकित्सा केन्द्र में उपचार हेतु ले जाएं और मितानिन ए.एन.एम. से ओ.आर.एस. के पैकेट हेतु संपर्क करें।
क्या न करें – गर्मी के दौरान बाहर न जाएं, यदि आपको आवश्यक कार्य के लिए बाहर जाना है तो दिन के शीतलन घंटो के दौरान बाहर जाएं। अत्यधिक गर्मी के घंटो के दौरान बाहर जाने से बचे (विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच)। - नंगे पैर या बिना चेहरे को ढ़के और बिना सिर ढककर बाहर न जाए।
- व्यस्ततम समय (दोपहर) के दौरान खाना पकाने से बचें, खाना पकाने वाले क्षेत्रों (रसोई घरों) में दरवाजे और खिड़कियां खोल कर रखें, जिससे पर्याप्त रूप से हवा आ सके।
- शराब, चाय, कॉफी और कार्बाेनेटेड पेय पीने से बचे जो शरीर को निर्जलित करते हैं। उच्च प्रोटीन, मसालेदार और तेलीय भोजन खाने से बचे, बासी खाना न खाएं।
- बीमार होने पर बाहर धूप में न जाए, घर पर रहे।
हीट वेव क्या करें और क्या न करें
जितना हो सके पर्याप्त पानी पीये, भले ही प्यास न लगी हो। मिर्गी, हृदय, गुर्दे या लीवर से संबंधित रोग वाले जो तरल प्रतिबंधित आहार लेते हो, तरल पदार्थ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें। हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहने। ओ.आर.एस. (ओरल रिहाइड्रेशन) घोल, घर का बना पेय लस्सी, (तोरानी चावल) का पानी, नींबू का पानी, छांछ आदि का उपयोग करें। बाहर जाने से बचे, यदि बाहर जाना आवश्यक है, तो अपने सिर (कपड़े/टोपी या छाता) और चेहरे को कवर करें। जहां तक संभव हो किसी भी सतह को छूने से बचें।
अन्य सावधानियां – जितना हो सके घर के अंदर रहें। अपने घर को ठंडा रखें-धूप से बचाव के लिए दिन में पर्दे, शटर का उपयोग करें और खिड़कियां खोलें। निचली मंजिलों पर बने रहने का प्रयास करे। पंखों का उपयोग करें, कपड़ों को नम करें और अधिक गर्मी में ठंडे पानी में ही स्नान करें। यदि आप बीमार महसूस करते हैं-उच्च बुखार/लगातार सिरदर्द/चक्कर आना/मतली या भटकाव/लगातार खांसी/सांस की तकलीफ है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाये। जानवरों को छाया में रखे और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें। इन उपायों का उपयोग कर लू या हीटवेव के प्रभाव से बचा जा सकता है।
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