- हल को मिला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का साथ : महल को सिर्फ चंद पूंजीपतियों और औद्योगिक घराने से मिली मदद

द सीजी न्यूज डॉट कॉम
छत्तीसगढ़ की कांग्रेसी राजनीति में इस समय हल और महल की रस्साकशी चल रही है। पिछले एक हफ्ते से ज्यादा समय से चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम को तब विराम लगा जब कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने हल के साथ खड़े होने के साफ संकेत दे दिये। दिल्ली में कांग्रेस विधायकों समेत सभी प्रमुख नेताओं के एकजुट होने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने किसान पुत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व पर मुहर लगा दी। महल की बजाय हल को तवज्जो मिलने से पूरा छत्तीसगढ़ खुश है।
दिल्ली के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने हल की ताकत को अच्छी तरह भांप लिया है। राज्य की 80 प्रतिशत आबादी कृषि कार्य से जुड़ी है और भूपेश सरकार ने पिछले ढाई साल में किसानों, आदिवासियों समेत वंचित वर्ग के हित में जितने फैसले किये हैं, उतने फैसले इससे पहले कभी भी, किसी भी सरकार ने नहीं किये। जाहिर है कि छत्तीसगढ़ के करीब 22 लाख किसान परिवार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ मजबूती से खड़े हैं।
सच यही है कि बीते ढाई साल में भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासियों और कमजोर तबके के साथ समूचे छत्तीसगढ़ राज्य की अस्मिता के प्रतीक बन चुके हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किसानों के कितने बड़े हितैषी हैं, इसका एक उदाहरण समझ लीजिये। पिछले साल भूपेश सरकार ने फैसला किया था कि फसल का उत्पादन करने पर किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 9 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से राशि दी जाएगी।
दिल्ली में राजनीतिक रस्साकशी के दौर के बाद वापस रायपुर लौटकर भूपेश बघेल ने ऐलान किया कि बारिश न होने से फसल बर्बाद होने पर भी किसानों को इसी दर पर राशि मिलेगी। अकाल जैसी स्थिति का सामना करने वाले किसानों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। ऐसी राहत भरे फैसले पहले कभी नहीं किये गए।
वैसे भी कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने हमेशा से किसानों के हित में फैसले किये हैं। यूपीए सरकार के कार्यकाल में मनमोहन सरकार ने किसानों का 72 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया था। पूर्व के वर्षों में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने कृषि उपकरणों की खरीदी और कर्ज माफी में भी कई बार राहत दी। भूपेश सरकार ने भी शुरू से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कई कदम उठाए। दूसरी ओर राज्य की रमन सरकार ने 15 साल तक और केंद्र की मोदी सरकार ने 7 साल में एक बार भी किसानों का न कर्जा माफ किया, न किसानों को कोई राहत दी।
यहां गौर करना जरूरी होगा कि हल के साथ 22 लाख किसान परिवारों के साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के साथ समूचा छत्तीसगढ़ खड़ा है। दूसरी ओर, महल का साथ कुछ पूंजीपति दे रहे हैं। कुछ कार्पोरेट घराने साजिश रच रहे हैं। दिल्ली में एक दिग्गज कांग्रेस नेता भी महल के साथ हैं, जो किसानों का हित नहीं बल्कि कार्पोरेट घरानों का हित चाहते हैं। प्रदेश की राजनीति में ओबीसी वर्ग के इक्का-दुक्का नेता भी हल विरोधी मुहिम से जुड़े हैं। महल का साथ न छत्तीसगढ़ की जनता दे रही है, न कांग्रेस विधायक, न आम कांग्रेसी।
इन्हीं तथ्यों की रौशनी में हल और महल की रस्साकशी के मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार भी किसानों के साथ ही खड़ा रहेगा। दिल्ली में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समर्थन में 55 विधायकों की मौजूदगी के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि कांग्रेस आलाकमान छत्तीसगढ़ के हल के साथ है, महल के साथ नहीं।
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