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हिंदी साहित्य भारती दुर्ग इकाई के तत्वाधान में डॉ. दीक्षा चौबे द्वारा विरचित कहानी संग्रह ‘पारिजात से झरे फूल’ का विमोचन किया गया। गरिमामयी पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ख्यातलब्ध वरिष्ठ साहित्यकार गुलबीर सिंह भाटिया थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में व्यंग्यकार राजशेखर चौबे, अध्यक्ष डॉ बलदाऊ राम साहू और समीक्षक के रूप में कैलाश बनवासी व डॉ. हंसा शुक्ला उपस्थित थे।
कार्यक्रम का आरंभ माँ सरस्वती के प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर हुआ। राजीव गाँधी खेल एवं लोककला भवन, सिविल लाइन में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी साहित्य भारती दुर्ग के मीडिया प्रभारी व कार्यक्रम के संचालनकर्ता विक्रम सिंह ‘अपना’ ने मधुर स्वर में माँ शारदे के भजन का गायन किया। इसके बाद अतिथियों द्वारा ‘पारिजात से झरे फूल’ पुस्तक का विमोचन किया गया।
लेखिका दीक्षा चौबे ने पुस्तक के स्वरूप, उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण समीक्षा का चरण प्रारंभ हुआ, जिसमें प्रसिद्ध कथाकार कैलाश बनवासी ने चालीस कहानियों के संग्रह पर निरपेक्ष भाव से समीक्षा की। उन्होंने बताया कि कहानी का स्वरूप संदेशपरक होने की बजाय इसकी कलात्मकता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। अलग-अलग बिंबों पर आधारित चालीस कहानियों के संग्रह की भरपूर प्रशंसा की।
हिंदी साहित्य भारती दुर्ग इकाई की अध्यक्षा व स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने बताया कि दीक्षा चौबे ने इस रचना के माध्यम से अपने नाम को सार्थक किया है। उन्होंने चालीस कहानियों के संग्रह को चालीसा के रूप में निरूपित किया। सारी कहानियाँ रोचक हैं जिनके पात्र व पृष्ठभूमि से ऐसा लगता है कि वे हमारे आसपास के ही हैं और हमारे परिवार के बीच से ही हैं। कहानियों की रोचक शैली के लिए लेखिका को बधाई व शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रायपुर के विख्यात व्यंग्यकार राजशेखर चौबे ने अपने चुटीले व रोचक अंदाज में अपनी बातें रखीं। मुख्य अतिथि गुलबीर सिंह भाटिया ने कहानी के भावनात्मकता मार्मिकता के साथ विशेष रूप से इसके कलात्मक पक्ष की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि कहानी एक चित्र की तरह हो, जिससे पाठक इसके सौंदर्य का रसास्वादन कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत पुस्तक की सभी कहानियाँ तारीफ के काबिल हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष की आसंदी से संबोधित करते हुए हिंदी साहित्य भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. बलदाऊ राम साहू ने सर्वप्रथम लेखिका को बधाई देते हुए कहा कि पुस्तक प्रकाशन व विमोचन के साथ वरिष्ठजनों के द्वारा समीक्षा का कार्य एक साहसिक कार्य है। इससे हमें अपनी कमियों को जानने का अवसर मिलता है। साथ ही वर्तमान युगीन कहानी के स्वरूप के अनुरूप लेखन में सहायता मिलती है। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का शाल व श्रीफल देकर सम्मान किया गया।
इस गरिमामय कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन व धन्यवाद ज्ञापन हिंदी साहित्य भारती के महामंत्री चंद्रकांत साहू ने किया। कार्यक्रम में डॉ. सुजाता दास, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रशांत कानस्कर, पुरबो हवा साहित्यिक समिति भिलाई के अध्यक्ष बागची, डॉ. राकेश चौबे. समीर चौबे, बृजेश कुमार तिवारी, डॉ. चित्ररेखा चौबे, योगेश शर्मा, रीता शर्मा, विमल तिवारी, शेफाली, आनंद, शीला तिवारी, रश्मि शुक्ला, विजय कुमार चौबे, दिव्या चौबे, प्रशांत तिवारी, परिवेश तिवारी, अविनाश कश्यप, प्रार्थना तिवारी, अनीश शर्मा, क्षितिज चौबे, सुभद्रा चौबे सहित बड़ी संख्या में कवि, लेखक व हिंदी साहित्य भारती के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन विक्रम सिंह ने किया।
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