- डीए और एचआरए की मांग करते हुए अधिकारीृ-कर्मचारियों ने शरू की आज से हड़ताल
द सीजी न्यूज
दुर्ग। राज्य सरकार द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों के डीए व एचआरए जैसे मौलिक अधिकारों का हनन करने के विरोध में छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों-अधिकारियों की पूर्व घोषित हड़ताल आज से शुरू हो गई। कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने इस मुद्दे को लेकर 25 जुलाई से 29 जुलाई तक कलम बंद, काम बंद हड़ताल का ऐलान किया है। फेडरेशन के आव्हान पर आज रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग सहित पूरे प्रदेश में हड़ताल का जबर्दस्त असर देखा गया।
कलम बंद, काम बंद हड़ताल के प्रथम दिन जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालयीन कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ। दुर्ग जिला के नगर निगम और नगर पालिका परिषद के कर्मचारी हड़ताल में रहे जिसके कारण दैनिक कार्य प्रभावित हुआ। हिंदी भवन के सामने सभास्थल पर मुख्य रूप से फेडरेशन के संजय शर्मा, शरद दुबे, शशि भूषण मोहंती, कुबेर देशमुख, दुर्गेश गुप्ता, आरिफ मोहम्मद, आलोक नारंग, हरि शर्मा, मोती खिलाडी, प्रतिभा श्रीवास्तव, राजेन्द्र राजपूत, गिरधर वर्मा, वी के राव, मोनिका सुकतेल, धर्मेन्द्र देशमुख,जी एस रावना सहित अनेक वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।
दुर्ग संभागीय मुख्यालय में फेडरेशन के सचिव राजेश चटर्जी, दुर्ग जिला संयोजक विजय लहरे व प्रवक्ता अनुरूप साहू ने बताया कि 1 जुलाई से 1 जुलाई 2022 तक स्वीकृत महँगाई भत्ता को केन्द्र सरकार के समान देय तिथि से राज्य सरकार द्वारा प्रभावशील नहीं किया गया है। इसके कारण कर्मचारियों और अधिकारियों को आर्थिक चपत लगी है। केंद्र शासन ने 1 जनवरी 2019 के 12 % महँगाई भत्ता में 5 % वृध्दि कर 1 जुलाई 2019 से 17 % घोषित किया था। वहीं, राज्य शासन ने 1 जुलाई 2021 से महँगाई भत्ता में 5 % वृध्दि किया। इसके कारण 1 जुलाई 2019 से 30 जून 2021 तक प्रदेश के कर्मचारी, अधिकारियों के मासिक वेतन में 5 % की कटौती हुई।

केन्द्र सरकार ने 1 जनवरी 20 का 4 %, 1 जुलाई 20 का 3 % और 1 जनवरी 21 का 3 % इस तरह कुल 11 % डी ए में वृद्धि की है। इस तरह 17% से 28 % की वृद्धि 1 जुलाई 21 से प्रभावशील हो गई। राज्य सरकार ने 1 जुलाई 21 से 30 अप्रैल 22 तक वेतन में 17 % कटौती कर डी ए में 5 % की वृध्दि 1 मई 22 से की है। केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 34 % डी.ए मिल रहा है जबकि राज्य में डी.ए. 22 % मिल रहा है, जो 1 मई 22 से प्रभावशील किया गया है। इसके कारण राज्य के कर्मचारी-अधिकारियों के मासिक वेतन में 12 % की कटौती हो रही है।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि गृहभाड़ा भत्ता स्वीकृति के मामले में राज्य सरकार कर्मचारी-अधिकारियों का आर्थिक शोषण कर रही है। राज्य में 1 जनवरी 2016 से सातवाँ वेतनमान लागू हो गया था, लेकिन कर्मचारी-अधिकारियों को आज पर्यन्त छठवें वेतनमान के मूल वेतन पर 10 % और 7% की दर से एच आर ए दिया जा रहा है। केन्द्र में 18 % और 9% एचआरए दिया जा रहा है।
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