द सीजी न्यूज
जांजगीर-चांपा / क्या छत्तीसगढ़ का अकलतरा क्षेत्र मुख्यमंत्रियों के लिए अशुभ है? कई दशकों से यह मिथक छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की अकलतरा नगर पालिका को लेकर कायम है। कहा जाता है कि यहां जो भी मुख्यमंत्री यहां आते हैं, उन्हें दोबारा सीएम का पद नहीं मिलता। अब बड़ा सवाल ये है कि भेंट मुलाकात कार्यक्रम के तहत सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों का दौरान करने निकले सीएम भूपेश बघेल क्या अकलतरा जाएंगे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिले की अन्य सीटों तक भेंट मुलाकात कार्यक्रम में शामिल हुए हैं लेकिन अभी तक वे अकलतरा में नहीं गए। सवाल किया जा रहा है कि क्या मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अकलतरा मुख्यालय जाएंगे या नहीं।
इन किस्सों के कारण अकलतरा चर्चा में
वर्ष 1958 में अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कैलाशनाथ काटजू यहां आए थे। वे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। वर्ष 1973 में यहां मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी का आगमन हुआ, वे भी दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन सके। छत्तीसगढ़ बनने के बाद वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी पहुंचे। 2003 में विधानसभा चुनाव होने पर न तो वे मुख्यमंत्री बने और न कांग्रेस की सरकार आई। मुख्यमंत्री जोगी से पहले अविभाजित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने 29 साल तक अकलतरा आने से परहेज किया।इन मुख्यमंत्रियों ने अकलतरा में नहीं रखा कदम
अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित श्यामाचरण शुक्ल, अर्जुन सिंह, सुंदरलाल पटवा, दिग्विजय सिंह यहां कभी नहीं आए। जोगी के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने रमन सिंह भी 15 साल में एक बार भी अकलतरा नगर में नहीं आए। 2018 के चुनावी कैंपेन में अकलतरा से लगी पंचायत तरौद चौक में वे पहुंचे, लेकिन उसके बाद भाजपा सत्ता से बाहर हो गई। इन उदाहरणों की जानकारी देकर स्थानीय नेता भी अपनी पार्टी के मुख्यमंत्रियों को यहां न आने के लिए कहते हैं।गजब का मिथक : चाय पीने ट्रेन से उतरे और मुख्यमंत्री रहने के बावजूद हार गए विधानसभा
कैलाश नाथ काटजू 1957 में दूसरी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसी दौरान वे ट्रेन से रायगढ़ जा रहे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अकलतरा स्टेशन के प्लेटफार्म में उनका स्वागत किया। वे चाय पीने के लिए उतरे और फिर रायगढ़ रवाना हो गए। अगले विधानसभा चुनाव में वे मुख्यमंत्री रहते हुए हार गए। बाद में नरसिंहगढ़ रियासत के राजा भानुप्रताप सिंह ने अपनी सीट खाली कर उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने कहा और उपचुनाव में वे विधानसभा सीट जीत गए, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन सके।
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