- ग्रामीणों ने तिलक लगाकर गायों का किया स्वागत
- दुग्ध उत्पादन इकाई के रूप में भी गौठान को विकसित करने काम तेजी से, मोहंदी में भी पहुंची उच्च नस्ल की साहीवाल और गिर गाय
द सीजी न्यूज
दुर्ग। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप दुर्ग जिले में अब ऑपरेशन फ्लड यानी दुग्ध क्रांति का आगाज किया जा रहा है। सीएम शुरू से गौपालन को बढ़ावा देने का आव्हान करते रहे हैं। लेकिन, गाय-भैंस के माध्यम से स्वसहायता समूह और किसानों की गतिविधियां गोबर बेचने तक ही सीमित रह गई थी। कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा की नवाचारी पहल पर अब जिले के 70 गौठानों में ऊंची नल्स की गायें पाली जाएगी। गिर और साहिवाल नस्ल की गायों को दुर्ग जिले के गौठानों में लाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। अगर सरकारी तंत्र की सर्वविदित लापरवाही न हुई तो वो दिन दूर नहीं जब दुर्ग में मिल्क रूट भी बनेगा और दुग्ध क्रांति का आगाज सफलता के मुकाम पर भी पहुंचेगा।
दो साल पहले राजधानी के मंत्रालय से दुर्ग जिले में उच्च अफसरों के दल ने मिल्क रूट डवलप करने की नसीहत दी थी। इस दिशा में काफी संभावनाएं होने के कारण दूध का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया। मगर, सरकारी तंत्र गोबर खरीदी और बिक्री में ही व्यस्त रहा। नवाचार यानी इनोवेशन के लिए पहचाने जाने वाले कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने जिले के गौठानों में ऊंची नस्ल की गायें पालने की सलाह दी। कलेक्टर की पहल पर इस दिशा में काम भी शुरू हो गया। दुर्ग जिले में गौठानों को दुग्ध उत्पादन की इकाई के रूप में विकसित करने और इसके माध्यम से गौठान की आय बढ़ाने और स्व सहायता समूह की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य शुरू हो गया है।
मोहलाई और चंदखुरी के बाद आज धमधा ब्लॉक के मोहंदी के गौठान में भी साहिवाल और गिर प्रजाति की गाय लाई गई है। गांव वालों ने गायों का स्वागत तिलक लगाकर पारंपरिक तरीके से किया। गिर और साहिवाल प्रजाति की गाय हर दिन लगभग 15 लीटर दूध देती है और इसके माध्यम से बड़ी आय की संभावनाएं हैं। इससे पहले मोहलाई और चंदखुरी में गौठान में ये गाय दी गई है। वहां हर दिन लगभग 15 सौ रुपए का दूध बेचा जा रहा है।
जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन ने बताया कि गौठान में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा के मार्गदर्शन में उच्च नस्ल की गाय मंगवाई जा रही है। अभी 70 गौठानों में उच्च नस्ल की गाय चरणबद्ध रूप से आएंगी। मंशा यही है कि स्थानीय स्तर पर दूध की पर्याप्त उपलब्धता हो जाए, ताकि पोषण का स्तर भी बढ़ सके। इससे स्व सहायता समूह की महिलाओं की आय बढ़ेगी।
जनपद पंचायत के एडीईओ राघवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि मोहंदी में जब उच्च नस्ल की गाय आई, तब गांव में उत्सव का माहौल था। लोगों ने पारंपरिक तरीके से पूजा कर गायों का स्वागत किया। उच्च नस्ल की गाय बड़ी काफी मात्रा में दूध देती है। इसकी वजह से पर्याप्त आय की संभावनाएं होती हैं। अन्य गौठान में भी समूह की महिलाएं उच्च नस्ल की गायों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन का कार्य आरंभ करेंगी। जनपद पंचायत सीईओ प्रकाश मेश्राम ने बताया कि जिन गौठानों में उच्च नस्ल की गाय मंगवाई जा रही है, वहां नेपियर जैसे चारे की पर्याप्त उपलब्धता है।
खास बात ये है कि ऊंची नस्ल की प्रजातियों की गायों से न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि नस्ल संवर्धन की संभावनाएं भी बढ़ेगी। उम्मीद है कि कलेक्टर की मुहिम रंग लाएगी। सरकारी तंत्र अगर सही मायने में गौठानों की मॉनिटरिंग करें और इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों का विस्तार किया जाए तो दुर्ग में मिल्की रूट बनाने की संभावनाएं कामयाबी का मुकाम हासिल कर सकती हैं।
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