द सीजी न्यूज
दुर्ग। विधानसभा चुनाव की जंग जीतने कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों ने ताकत झोंकने का सिलसिला तेज कर दिया है। दुर्ग जिले के 6 विधानसभा क्षेत्रों में दोनों दलों के पॉलिटिकल लीडर्स चुनावी जीत के लिए रणनीति तय कर रहे हैं। प्रत्याशियों के जनसंपर्क का दौर शुरू हो गया है। अलग-अलग काम के लिए टीम बनाकर बैठकों के साथ रूठों को मनाने का सिलसिला भी चल रहा। पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए सेटिंगबाजी का खेल भी शुरू हो गया है।
पाटन सीट पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एकतरफा लहर चल रही है। यहां के बारे में कहा जा रहा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ज्यादा जोश आम जनता में है। भूपेश के सिपहसालार भी पाटन का चुनावी माहौल और जोश देखकर हतप्रभ हैं। पूरे पाटन क्षेत्र में अगर किसी की चर्चा है तो वो सिर्फ और केवल सिर्फ भूपेश बघेल हैं। यहां सिर्फ एक ही मुद्दा है – भूपेश बघेल को ऐतिहासिक जीत दिलाने का मुद्दा। सिर्फ एक नारा चल रहा है – भूपेश कका जिंदाबाद। यहां चुनावी वादे, आरोप-प्रत्यारोप जैसे शब्द बेमानी हो गए हैं। सच्चाई ये है कि भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल को कार्यकर्ता नहीं मिल रहे हैं। हाल ये है कि भाजपा का माहौल दिखाने के लिए दूसरे इलाकों से कार्यकर्ता आयातित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में भिलाई चरौदा नगर निगम, जामुल नगर पालिका और अहिवारा नगर पालिका आते हैं। भिलाई चरौदा के महापौर निर्मल कोसरे ही अहिवारा से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। जामुल और अहिवारा में भाजपा का दबदबा है। भाजपा ने पूर्व विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को प्रत्याशी बनाया है। कोर्सेवाड़ा की टीम और नेटवर्क काफी मजबूत है। क्षेत्र में पकड़ भी मजबूत है। इस मजबूत पकड़ को कमजोर कर कांग्रेस का परचम लहराने में निर्मल कोसरे को जमकर पसीना बहाना पड़ेगा, यह तय है। सीएम भूपेश बघेल का निवास भी भिलाई चरौदा नगर निगम में है। लिहाजा, यहां सीएम की साख भी दांव पर है। कहा जा रहा है कि जामुल और अहिवारा में कोसरे की टीम को कोष और जोश पर ज्यादा फोकस करना पड़ेगा।
दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू और भाजपा के युवा तुर्क ललित चंद्राकर के बीच कड़ा मुकाबला है। यहां भाजपा एकजुट है। चुनाव संचालक प्रीतपाल बेलचंदन का चुनाव प्रबंधन बेहद सधा हुआ है। उनके अनुभव और क्षेत्र में उनकी टीम का फायदा भी ललित चंद्राकर को मिल रहा है। ताम्रध्वज साहू का इलेक्शन मैनेजमेंट भी काफी मजबूत है। ताम्रध्वज की खासियत यह है कि वे दुश्मन को कमजोर नहीं आंक रहे, बल्कि पैनी और चौकन्नी नजरों से समूचे प्रबंधन पर नजर रख रहे हैं। इसके बावजूद, क्षेत्र में युवाओं का एक समूह ताम्रध्वज साहू से नाराज है। नाराज चल रहे कई कांग्रेसी यहां खेला करने के मूड में हैं।
वैशाली नगर में रिकेश सेन को भाजपा प्रत्याशी बनाने से जितनी नाराजगी भाजपाईयों में है, उतनी ही नाराजगी कांग्रेस में मुकेश चंद्राकर को प्रत्याशी बनाने से है। दोनों का चुनाव प्रबंधन बिखरा-बिखरा सा है। दोनों दलों से टिकट के प्रबल दावेदार रहे नेताओं की नाराजगी को अभी तक पूरी ईमानदारी से साधने की कोशिश नहीं हुई है। इसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। दोनों दलों के चुनाव प्रबंधक अपने लोगों की नाराजगी किस हद तक दूर कर पाएंगे, यह भविष्य के गर्त में है। चुनाव प्रबंधकों की तगड़ी टीम का दोनों दलों में अभाव है।
दुर्ग शहर में भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र यादव के पास आरएसएस की टीम की बड़ी ताकत है। चुनावी जंग से जुड़े प्रबंधन के हर काम में फिलहाल गजेंद्र आगे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा का चुनाव प्रबंधन धीरे-धीरे अब पटरी पर आने लगा है। वोरा के चुनाव प्रबंधकों को याद रखना होगा कि इस बार के चुनाव में सुपर पॉवर मोतीलाल वोरा से मिलने वाली अकूत ताकत अब उनके पास नहीं है। दिग्गज नेता के आशीर्वाद और उनकी नसीहतों के अनुसार समय रहते माइक्रो प्लानिंग होने पर ही अरुण वोरा की चुनावी डगर आसान हो पाएगी। लेकिन, यहां के इलेक्शन मैनेजमेंट में अभी भी कई छेद हैं।
भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र में कांटे की टक्कर है। भाजपा प्रत्याशी प्रेमप्रकाश पांडेय प्रदेश के बेहद अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। पिछले चुनाव में तीन हजार से भी कम वोट से हारने के बाद उन्होंने पांच साल में पराजय का गड्ढा पाटने और जीत की राह तय करने की कोशिश में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी है। ट्रपल पी के दांव पेंच के आगे कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र यादव कितने सफल होंगे, यह कह पाना अभी मुश्किल है। खबर मिल रही है कि ट्रपल पी ने कई कांग्रेस पार्षदों से डील कर ली है। मतदान के दिन खेला करने की डील …।
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