द सीजी न्यूज
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद अब कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले हैं। वे राजनांदगांव से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। इसे लेकर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में प्रस्ताव रखा गया। बैठक में मोहम्मद अकबर ने यह प्रस्ताव रखा। इसके बाद सभी ने इस पर अपनी सहमति दी। बैठक में कमेटी अध्यक्ष रजनी पाटिल, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज सहित कमेटी के सदस्य शामिल हुए।
दोपहर 3 बजे तक 5 लोकसभा सीटों की चर्चा पूरी हो चुकी थी। बैठक की शुरुआत रायपुर लोकसभा से हुई। रायपुर के बाद दुर्ग, महासमुंद, राजनांदगांव और बिलासपुर सीट पर चर्चा हुई। कमेटी की ओर से लोकसभावार दावेदारों के नाम मांगे गए। कुछ मौजूदा विधायकों से चुनाव लड़ने को लेकर राय मांगी गई। कुछ पूर्व विधायकों ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। कुछ नेताओं की ओर से यह भी सुझाव दिया गया है कि पूर्व मंत्रियों को चुनाव लड़ाया जाना चाहिए।
अलग-अलग नेताओं की ओर से कई नाम बैठक में सुझाए गए, जैसे पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, विधायक भोलाराम साहू, हर्षिता स्वामी बघेल, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, गुरुमुख सिंह होरा, अमितेष शुक्ला, कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला, अमरजीत चावला सहित कई और नाम हैं।
अभी बस्तर, कांकेर, रायगढ़, सरगुजा, जांजगीर, कोरबा सीट पर चर्चा बाकी है। इन सीटों में कांग्रेस से दो मौजूदा सांसद दीपक बैज और ज्योत्सना महंत के नाम स्वाभाविक रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही पूर्व मंत्री मोहन मरकाम, पूर्व विधायक संतकुमार नेताम, कांग्रेस नेता बीरेश ठाकुर, विधायक अनिला भेड़िया जैसे नाम की भी चर्चा है।
ED की FIR पर भूपेश बघेल का बड़ा बयान
ACB में ED की FIR पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 3 साल से ED और IT जांच कर रही है। ACB को अब कहा गया कि FIR करें। जब ED और IT जांच कर रही थी, तब न यूडी मिंज का नाम था, न अमरजीत भगत का नाम था। आज अचानक एसीबी ने केस रजिस्टर किया है।
भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं का नाम एफआईआर में लिख दिया गया। प्रदेश के नेताओं को बदनाम करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। यूडी मिंज का दोष इतना था कि वह विष्णुदेव साय के खिलाफ चुनाव लड़े। ACB जांच का आदेश मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर से होता है। जब ACB जांच कर रही है तब किसी नेता का नाम नहीं आया था। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इन्हें बदनाम किया जा रहा है।
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