1966 में जन्मे सोनम वांगचुक एक मैकेनिकल इंजीनियर और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) के निदेशक हैं। उन्हें वर्ष 2018 में मैगसेसे पुरस्कार मिल चुका है। वांगचुक के व्यक्तित्व पर ही आधारित फिल्म थी’3 इडियट्स’ जिसमें आमिर खान ने सोनम वांगचुक का कैरेक्टर फुनसुख वांगडू के रूप में किया था।
द सीजी न्यूज
सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद्, इनोवेटर और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक बीते 6 मार्च 2024 से लेह में भूख हड़ताल कर रहे हैं। लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा उपाय दिए जाने की मांग कर रहे पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर है। सोमवार (25 मार्च) को उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि अभी तक सरकार से एक शब्द नहीं बोला गया है।
सोनम वांगचुक ने बताया है कि वह केवल पानी और नमक का सेवन कर रहे है। उन्होंने अपनी मुहिम को क्लाईमेट फास्ट नाम दिया है। सोनम वांगचुक के समर्थन में भारी संख्या में लोग भी उपवास कर रहे है। वांगचुक अपनी भूख हड़ताल के दौरान रोजाना सोशल मीडिया पर अपडेट दे रहे हैं।
दरअसल, पिछले दिनों दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ लद्दाख की एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमाक्रेटिक अलायंस की बातचीत का हल नहीं निकला था, जिसके बाद सोनम वांगचोक ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। रविवार (24 मार्च) सुबह कारगिल के हुसैनी पार्क में केडीए ने भी अपने समर्थकों के साथ भूख हड़ताल शुरू की थी।
‘लोकतंत्र के लिए बहुत ही असामान्य’
सोमवार (25 मार्च) को सोनम वांगचुक ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट किया, ”मेरे क्लाइमेट फास्ट का 20वां दिन। 3000 हजार लोग मेरे साथ उपवास कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की तरफ से एक शब्द भी नहीं बोला गया। लोकतंत्र के लिए बहुत ही असामान्य… जब 90 फीसद आबादी नेताओं को उनके वादे याद दिलाने के लिए सामने आई है और सैकड़ों लोग 20 दिन से अनशन पर हैं, लेकिन हम देश भर में जनता के समर्थन से बहुत प्रभावित हैं …।”
सोनम वांगचुक की मांग क्या है?
सोनम वांगचुक और उनके समर्थक केंद्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा दिया जाए और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा वो लद्दाख के लिए दो लोकसभा सीटें और एक राज्यसभा की सीट भी मांग रहे हैं। सोनम वांगचुक और उनके समर्थक चाहते हैं कि लद्दाख में दो लोकसभा की सीटें हों जिन पर चुनाव हो और एक सीट राज्यसभा के लिए भी इस राज्य से चुन कर भेजी जाए। इसी मांग को लेकर वांगचुक और उनके समर्थक 6 मार्च से लेह में भूख हड़ताल पर हैं। इस भूख हड़ताल से पहले तीन फरवरी को भी लेह में इन मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ था।
आखिर छठी अनुसूची है क्या? दरअसल, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 के अंतर्गत छठी अनुसूची स्वायत्त प्रशासनिक प्रभागों में स्वायत्ता जिला परिषदों के गठन का प्रावधान करती है। इनके पास एक राज्य के भीतर कुछ विधायी, न्यायिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है। जिला परिषदों में कुल 30 मेंबर होते हैं और चार मेंबर्स को राज्यपाल नियुक्त करता है। जबकि, छठी अनुसूची के मुताबिक जिला परिषद की अनुमति से ही क्षेत्र में उद्योग लगाए जा सकेंगे।
यही वजह है कि सोनम वांगचुक और उनके समर्थक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा दिलाना चाहते हैं। इस मांग पर तर्क देते हुए पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक कहते हैं, ‘अनुच्छेद 244 की छठी अनुसूची लद्दाख जैसे जनजातीय क्षेत्र के लोगों और संस्कृतियों को सुरक्षा प्रदान करता है और साथ ही वहां ये निर्धारित कर सकता है कि इन स्थानों को दूसरों के हस्तक्षेप के बिना कैसे विकसित किया जाए।
मेनस्ट्रीम मीडिया की आलोचना की
सोनम वांगचुक ने कहा, ”जहां तक नेताओं और मुख्यधारा के मीडिया की बात है, जो लोकतंत्र के स्तंभ की तरह है, मुझे यकीन है कि उनकी अंतरात्मा उन्हें रात को सोने नहीं देगी, उन्हें एहसास कराएगी कि वे लद्दाख के साथ क्या कर रहे हैं। मैं बस आप सभी को धन्यवाद देता हूं, देश के नागरिक को, सामान्य शक्तिहीन नागरिकों को, जो लद्दाख के लिए ऐसे सहारा बने जिन्होंने मीडिया बनकर हमारी बातों को दूर-दूर तक देश के हर नागरिक तक पहुंचाया।
सोनम वांगचुक ने पीएम, गृह मंत्री और राष्ट्रपति से जताई उम्मीद
सोनम वांगचुक ने कहा, ”मुझे यकीन है कि यह हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री और माननीय राष्ट्रपति तक भी पहुंचेगा और मुझे अब भी विश्वास है कि वे जल्द ही समझेंगे और न्याय करेंगे। मैं आज बस इतना ही कह सकता हूं. बहुत बहुत धन्यवाद और जय हिंद।” वीडियो के अंत में लिखकर होली की शुभकामनाएं भी दी गई हैं।
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