
- पिछड़े वर्ग का बड़ा चेहरा हैं भूपेश, किसानों के हितैषी नेता की छवि भी असरदार
- कांग्रेस के उच्चस्तरीय सूत्र कह रहे … मुख्यमंत्री बदलने की संभावना दूर-दूर तक नहीं, पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे भूपेश बघेल
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के कार्यकाल के मुद्दे पर फिलहाल विराम लग गया है। कांग्रेस के उच्चस्तरीय सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व पर पूरा-पूरा भरोसा जताया है और हाल-फिलहाल किसी भी सूरत में नेतृत्व परिवर्तन नहीं किया जाएगा। दरअसल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में चल रही कांग्रेस सरकार के फैसलों की देश के कई राज्यों में धूम मची है। भूपेश सरकार के जनहितकारी फैसलों से छत्तीसगढ़ में विपक्ष के हौसले पस्त हो चुके हैं।
भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने किसानों, मजदूरों, व्यापारियों के हित में कई फैसले करते हुए ग्रामीण अंचल को आत्मनिर्भर बनाने अनेक योजनाएं लागू की। किसानों की कर्ज माफी, बिजली बिल हाफ, 9 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से किसानों को भुगतान करने राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना के तहत 2 रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदी, 52 वनोपज की खरीदी समर्थन मूल्य में करने के फैसले किये। उद्योगपति से आदिवासियों की जमीन वापस कराने, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने, गरीब भूमिहीन कृषि मजदूर को 6 हजार रुपए की सहायता प्रति वर्ष देने का फैसला भी किया गया।
ये निर्णय देश के दूसरे राज्यों में भी एक आदर्श मॉडल की तरह देखे जा रहे हैं। कांग्रेस ने महाराष्ट्र और असम के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ मॉडल को ही सामने रखकर चुनाव लड़ा और पार्टी को इसमें सफलता भी मिली। आगामी 2022 में उत्तरप्रदेश, पंजाब सहित अन्य कृषि प्रधान प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हैं। उच्चस्तरीय सूत्रों का कहना है कि इन राज्यों में भी कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ सरकार के फैसलों का मॉडल सामने रखकर चुनाव लड़ना चाहती है। चुनाव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किसानों और पिछड़े वर्ग का प्रमुख चेहरा बनकर कांग्रेस पार्टी के प्रचार अभियान का हिस्सा बनेंगे।
सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ मॉडल को सामने रखकर चुनाव लड़ने की स्थिति में नेतृत्व परिवर्तन करने पर विपक्षी नेता कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर सकते हैं। आम जनता की ओर से भी सवाल किये जा सकते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस आलाकमान उत्तरप्रदेश, पंजाब सहित अन्य राज्यों के चुनावों को देखते हुए अभी छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में नहीं है।
कांग्रेस सूत्रों का मानना है कि पार्टी संगठन का ढांचा मजबूत करने बूथ स्तर पर कार्य योजना बनाने में छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का उपयोग असम चुनाव में किया गया। आगामी दिनों में उत्तरप्रदेश में भी यही प्रयोग करने की तैयारियां चल रही है। लिहाजा, कांग्रेस पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेकर आगामी चुनावों से पहले कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। वैसे भी छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के जनहित के फैसलों से उनकी ऐसी छवि बन चुकी है कि भूपेश बघेल की लोकप्रियता के मुकाबले में प्रदेश में कोई और दूसरा नेता दूर-दूर तक नहीं है। जाहिर है कि ऐसी हालत में नेतृत्व परिवर्तन का सवाल जितना बेबुनियाद है, उतना हवा हवाई भी है।
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