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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्तीय वर्ष 2022-23 हेतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विभागों के लिए 12681 करोड़ 75 लाख 82 हजार रुपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गईं। इस राशि में से सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 339 करोड़ 68 लाख 81 हजार रुपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय के लिए 429 करोड़ 60 लाख 90 हजार रुपए, वित्त विभाग से संबंधित व्यय के लिए 7734 करोड़ 24 लाख 25 हजार रुपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय के लिए 208 करोड़ 65 लाख रुपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय के लिए 2634 करोड़ 17 लाख 38 हजार रुपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय के लिए 751 करोड़ 70 लाख 42 हजार रुपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय के लिए 329 करोड़ 87 लाख 10 हजार रुपए, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के लिए 192 करोड़ 32 लाख 68 हजार रुपए और विमानन विभाग के लिए 61 करोड़ 49 लाख 28 हजार रुपए का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘सेवा, जतन, सरोकार’ और ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ इन दो ध्येय वाक्यों को लेकर चल रही है। एक ओर जहां जनता को जल्दी से जल्दी राहत पहुंचाने पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर उन्हें प्रदेश के विकास में भागीदार बनाने के हरसंभव उपाय कर रहे हैं। वर्ष 2018 में जिन हालात में कराहता हुआ छत्तीसगढ़ मिला था, उसकी याद करके भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हमने तीन वर्षों में बहुत से बड़े-बड़े बदलाव लाए हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ की जनता को राहत भी मिली और सशक्तिकरण भी हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज ऐसी धरोहर है, जिससे वर्तमान को संवारना है और इसे भविष्य के लिए सुरक्षित भी रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी खनिज संसाधन मिल सके। बहुत ही पारदर्शी नीतियां और योजनाएं बनाई गई हैं, जिसके कारण एक ओर खनिज राजस्व में तेजी से वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर इनका लाभ स्थानीय निवासियों को मिल रहा है। राज्य के समग्र विकास में हमारे खनिज संसाधन का समुचित उपयोग किया जा रहा है। खनिज राजस्व में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग 11 हजार 900 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

डीएमएफ का उपयोग अब खनन संक्रियाओं से प्रभावित व्यक्तियों और क्षेत्र के विकास में किया जा रहा है। डीएमएफ के अंशदान से जिलों के कुपोषण दर कम करने, स्वास्थ्य, शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने, कृषि, प्रसंस्करण को बढ़ावा, रोजगार और हितग्राही मूलक कार्य प्राथमिकता से मंजूर  हो रहे है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल से दिसम्बर, 2021 तक डीएमएफ मद में अंशदान के रूप में 2 हजार 20 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है। डीएमएफ से अंशदान के रूप में वर्ष 2015 से अब तक कुल 8 हजार 35 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में कुशल प्रबंधन और सही अनुशासन का पालन किया। कोरोना, कोयला संकट, लॉकडाउन जैसे तमाम अवरोधों के बावजूद सर्वाधिक उत्पादन, उपलब्धता और आपूर्ति के कीर्तिमान बनाए। जब राज्य का गठन हुआ था, तब छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग सिर्फ 1 हजार 334 मेगावाट होती थी। 2018 के अंत में 4 हजार 559 मेगावाट पहुंची और आज 5 हजार 57 मेगावाट के शीर्ष को हमने छुआ है। कुशल प्रबंधन से पारेषण हानि 3 प्रतिशत के करीब ला दी है, जो नियामक आयोग द्वारा निर्धारित लक्ष्य 3.22 प्रतिशत से भी कम है। हाफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 400 यूनिट खपत पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इस योजना के तहत हमने अभी तक 40 लाख 74 हजार घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 2200 करोड़ रुपए की राहत दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बंद हो चुकी पुरानी पेंशन को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है, इससे अधिकारियों कर्मचारियों को बुढ़ापे की चिंता नहीं रहेगी, क्योंकि उन्हें पेंशन मिलेगी। 1 हजार 483 ग्राम में बैंकिंग सेवा पहुंचाई गई है, जो लक्ष्य का लगभग 96.3 प्रतिशत होता है। लगभग 4 हजार बीसी सखियों की सेवाएं भी सराहनीय है। जहां 91 हजार करोड़ रुपए लोगों की जेब में डाले, वहीं इन पैसों की सुरक्षा की दिशा में भी प्रयास करने में सफल हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसम्पर्क विभाग द्वारा पंडित माधवराव सप्रे के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार तथा स्व. चंदूलाल चन्द्राकर और स्व. मधुकर खेर की स्मृति में प्रतिवर्ष चयनित पत्रकारों को पुरस्कार दिया जाता है। इसके अलावा 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को मुख्यमंत्री सम्मान निधि के रूप में 10 हजार रुपए की राशि देने की व्यवस्था की गई है। मीडियाकर्मियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में चिकित्सा सहायता अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। 5 नए जिलों में जनसम्पर्क कार्यालयों की स्थापना के लिए भी हमने प्रावधान किया है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में  विमानन सुविधाओं के विकास के संबंध में कहा कि रीजनल कनेक्टिविटी योजना अंतर्गत जगदलपुर, बिलासपुर एयरपोर्ट को 3सी-व्हीएफआर एयरपोर्ट अनुरूप विकसित कर इनका लायसेंस प्राप्त किया गया है। राज्य शासन द्वारा मां महामाया एयरपोर्ट, अम्बिकापुर दरिमा के रनवे के विकास के लिए राशि 43 करोड़ 98 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। एयरपोर्ट का विकास 3सी-व्हीएफआर एयरपोर्ट अनुरूप किया जा रहा है। शीघ्र ही एयरपोर्ट का लायसेंस प्राप्त कर यहां से घरेलू विमान सेवा प्रारंभ करने की योजना है।माना रायपुर एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की अपार संभावनाओं को देखते हुए राज्य शासन ने यहां से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा का संचालन प्रारंभ करने और व्यापार, वाणिज्य गतिविधियों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्गाे सुविधा विकसित करने का अनुरोध किया है। रायपुर से दुबई और सिंगापुर के लिए विमान सेवा शीघ्र प्रारंभ करने का अनुरोध केन्द्र सरकार से किया है।