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हाऊसिंग बोर्ड में गड़बड़-घोटाला : तालपुरी कॉलोनी निर्माण में चार अधिकारियों की मिलीभगत से 15 करोड़ की गड़बड़ी : कार्यालय से दस्तावेज गायब : जांच रिपोर्ट में कार्रवाई की अनुशंसा

द सीजी न्यूज

दुर्ग। भिलाई के रुआबांधा में तालपुरी इंटरनेशनल कालोनी के निर्माण कार्य में चार अधिकारियों द्वारा गड़बड़ी कर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में करीब 15 करोड़ की गड़बड़ी का पता चला है। छत्तीसगढ़ हाऊसिंग बोर्ड की विभागीय स्तर पर हुई जांच में भी चारों अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ रकम वसूली की कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है।

कॉलोनी में करीब 1800 मकान ईडब्ल्यूएस और 1800 सामान्य एलआईजी, एमआईजी व एचआईजी आवासों का निर्माण किया गया। ईडब्ल्यूएस आवासों को पारिजात व अन्य आवासों को गुलमोहर, लोटस, रोज, लिली, टिली, बीजी, डहलिया, आर्किड जूही, मोंगरा टाइप बनाया गया। इस पर लगभग 550 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कॉलोनी का निर्माण करने कलकत्ता के मेकेरोज बर्न लिमिटेड को भवन निर्माण करने का ठेका दिया था, लेकिन ठेकेदार काम पूरा किए बिना गायब हो गया।


हाऊसिंग बोर्ड के चार अधिकारियों बीबी सिंह, तत्कालीन कार्यपालन अभियंता, हर्ष कुमार जोशी, एमडी पनारिया और एचके वर्मा ने इसका लाभ उठाया। ठेकेदार अगर कार्य अपूर्ण स्थिति में छोड़ता है तो अन्य एंजेसी-ठेकेदार से कार्य पूर्ण कराया जाता है। कार्य पर होने वाले अतिरिक्त व्यय की वसूली संबंधित ठेकेदार से की जाती है और शेष कार्य के लिये निविदा आमंत्रित किया जाता है। अंतर की राशि की कटौती इनके बिलों से करके ही शेष धनराशि का भुगतान किया जाता है। जिम्मेदार अधिकारियों ने शेष कार्य पूर्ण कराने बिना पंचनामा किये निविदा निकाले बिना ही अपने चेहते ठेकेदार से कार्य पूर्ण कराया। प्रथम ठेकेदार से 18 प्रतिशत ब्याज दर से राशि की वसूली करने की बजाय उसे 11 प्रतिशत ब्याज दर से राशि वसूल किया गया। यानी सीधे सीधे ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया।
इसका खुलासा तब हुआ जब भवन बुक कराने वाले लोगों से 15 करोड़ का सर्विस टैक्स वसूल कर ठेकेदार को दे दिया गया। उच्च कार्यालय से सर्विस टैक्स वसूलने के लिए मना किया गया था। चारों अधिकारियों ने प्रथम ठेकेदार और द्वितीय ठेकेदार दोनों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया। इस प्रकार शासन को भी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
सर्विस टैक्स वसूले जाने के बाद इस मामले की शिकायत राजधानी में की गई। इसकी जांच कर ली गई है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि चारों अधिकारियों से 15 करोड़ रुपए वसूल किया जाना चाहिए। चारों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की अनुशंसा भी की गई है। जांच रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए शर्तों में भी बदलाव किया गया है। इसके सबूत मिटाने के लिए कार्यालय से दस्तावेज भी गायब कर दिये गए।   

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