द सीजी न्यूज
दुर्ग। खाद्य विभाग की लापरवाही और नाकाम व्यवस्था को लेकर पूर्व विधायक अरुण वोरा और पूर्व महापौर आरन वर्मा आज खाद्य विभाग पहुंचे और अधिकारियों को जवाब तलब किया। वोरा ने खाद्य विभाग में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश में गरीबों के हक पर लगातार डाका डाला जा रहा है। भाजपा सरकार गरीब कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ लाखों गरीब परिवारों को पिछले तीन महीनों से राशन दुकानों में मिलने वाली शक्कर के लिए भटकना पड़ा रहा है।
वोरा ने कहा कि जिले में राशनकार्डों में दर्ज 1 लाख 33 हजार सदस्यों की ई केवाईसी अभी तक पेंडिंग है। शासन ने 15 जुलाई तक इसे अनिवार्य रूप से पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी न होने पर हजारों परिवार राशन व्यवस्था से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। सरकार और खाद्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवार भुगत रहे हैं। जिन परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना चुनौती है, उन्हें राशन की सामग्री के लिए भटकाया जा रहा है। तीन-तीन महीने तक शक्कर का वितरण न होना प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी के नाम पर भी गरीबों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। केवायसी प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। विभाग ने जागरूकता और सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए हैं। वोरा ने अधिकारियों से तीन माह की शक्कर का तत्काल वितरण सुनिश्चित करने, ई-केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने की मांग की। उन्होंने कहा कि गरीबों के हक़ पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। व्यवस्था में सुधार न होने पर कांग्रेस के सिपाही जनता के साथ मिलकर संघर्ष करेंगे।
पूर्व महापौर आरएन वर्मा ने कहा कि गरीबों के अधिकारों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। खाद्य विभाग को तत्काल लंबित शक्कर वितरण सुनिश्चित करना चाहिए और ई-केवाईसी प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना चाहिए, ताकि किसी भी हितग्राही को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े।
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