मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर राज्य के सभी स्कूली बच्चों को कोरोना संक्रमण काल में मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बताया कि राज्य शासन के निर्णय के अनुसार कोविड-19 के संक्रमण के चलते स्कूलों के बंद रहने की अवधि 16 जून से 31 जुलाई तक कुल 38 शालेय दिवस का मध्यान्ह भोजन का सूखा राशन स्कूली बच्चों को खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में दिया जाएगा।

सूखा राशन सामग्री का वितरण सुविधानुसार स्कूल में या घर-घर पहुंचाकर देने के निर्देश दिए गए हैं। वितरण के दौरान बच्चों या पालकों के बीच सामाजिक दूरी बनाए रखी जाएगी। लोक शिक्षण आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मध्यान्ह भोजन नियम के प्रावधान के अंतर्गत बच्चों को स्कूल बंद रहने की अवधि में खाद्य सुरक्षा भत्ता प्रदान करना है। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और निर्धारित कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी वितरित करना है। कक्षा पहली से 8 वीं तक उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला या मदरसा-मकतबा में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया जाएगा। सूखा राशन वितरण में बच्चों को चावल, दाल और तेल की मात्रा भारत सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से कम नहीं होनी चाहिए। सामग्रियों को पृथक-पृथक सील बंद पैकेट बनाकर प्रति छात्र सभी सामग्रियों का एक बड़ा पैकेट बनाया जाएगा। खाद्य सामग्रियां उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। पैकिंग के पहले और बाद में फोटोग्राफ भी लिए जाएंगे। सामग्री के ब्रांड से संबंधित फोटोग्राफ और सामग्री नमूने के लिये एक माह तक रखी जाएगी। शिकायत होने पर गुणवत्ता के संबंध में जांच की जा सकेगी।

प्राथमिक स्कूलों में 38 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 3 किलो 800 ग्राम, दाल 760 ग्राम, आचार 238 ग्राम, सोयाबड़ी 380 ग्राम, तेल 190 ग्राम और नमक 238 ग्राम दिया जाना है। माध्यमिक स्कूलों में 38 दिनों के लिए प्रति छात्र चावल 5 किलो 700 ग्राम, दाल एक किलो एक किलो 140 ग्राम, आचार 380 ग्राम, सोयाबड़ी 570 ग्राम, तेल 285 ग्राम और नमक 380 ग्राम प्रदाय किया जाना है।