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सुन ले कका … हमरो व्यथा … 55 दिनों से मनरेगा कर्मियों की हड़ताल जारी …

द सीजी न्यूज 

रायपुर / छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष चन्द्रशेखर अग्निवंशी, कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम कुर्रे और प्रवक्ता सूरज सिंह ठाकुर ने आज प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अपील की है कि उनकी मांग गैर वित्तीय मांग है। इस मांग पर सार्थक पहल करने की जरूरत है। विगत वर्षों में मनरेगा योजनांतर्गत कार्य करने वाले 3000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी या सेवा से बर्खास्तगी कर दी गई है। घोषणा पत्र में किसी भी संविदा कर्मचारियों की छंटनी न करने का वादा किया गया है, लेकिन लगातार 3 वर्षों से प्रशासनिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।


उन्होंने कहा कि विगत 3 वर्षों में 200 से ज्यादा मनरेगा कर्मी शहीद हुए है, किंतु उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा नहीं दी गई। उन परिवारों को आज भी न्याय का इन्तजार है। 10 घंटे से ज्यादा काम करने के बावजूद मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है, जिसके कारण कर्मचारी हीनभावना का शिकार हो रहे हैं| पिछले वित्तीय वर्ष में 6 माह बिना वेतन के काम करते हुए लक्ष्य पूरा किया, लेकिन प्रशासन स्तर पर हमारे लिए कोई संवेदना नहीं दिखाई गई।

चंद्रशेखर ने कहा कि 28 जिलों में संविदा सेवा विस्तार नहीं किया गया है, जिसके कारण कर्मचारियों में प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है। दो वर्षों के कोरोना काल में राज्य का सम्मान और मान बढ़ाया। सबसे ज्यादा कार्य किया, लेकिन शासन की ओर से कोई सहानुभूति नहीं है। तीन साल से केवल आश्वासन दिये जा रहे हैं जिसके कारण हड़ताल की स्थिति निर्मित हुई। विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देकर भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है कि मनरेगा कर्मी गलत समय पर आंदोलन कर रहे हैं। जनवरी 2021 से लगातार शासन के समक्ष धरना , रैली के माध्यम से अपनी मांग से अवगत कराया जा रहा है। 31 मार्च 2022 तक लक्ष्य के अनुपात में 120 प्रतिशत प्रगति रही। 1 अप्रेल 2022 से शासन के समक्ष अपनी गैर वित्तीय मांग पूरा करने के लिए निवेदन किया गया ।

मनरेगा कर्मियों ने अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 तक 6 माह बिना वेतन के कार्य किया। पिछले 3 वर्षों के कोरोना काल में सबसे अधिक रोजगार सृजन कर छत्तीसगढ़ राज्य देश मे अव्वल रहा । विगत 3 वर्षों के कोरोना काल में 250 के करीब मनरेगा कर्मचारी ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराते हुए दिवंगत हुए । विगत वर्षों मे किए कार्यों से राज्य को 31 राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद करते हुए सार्थक पहल करे। गैर वित्तीय मांग है जिसे हमारी सरकार पूरी करना चाहती है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भ्रांतिपूर्ण तथ्य शासन के समक्ष रखने के कारण पहल नहीं हो पा रही है।

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