मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अजरूल की साहस की सराहना करते हुए कहा कि एक बच्चे ने दूसरे बच्चे की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी, अजरूल की जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है।

राहुल को निकालने में प्रशासन का पूरा अमला लगा हुआ था। 104 घंटे के इस रेस्क्यू अभियान को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने में अजरूल हक की महत्वपूर्ण भूमिका थी। अजरूल रायपुर स्मार्ट सिटी में सीवरेज सिस्टम में कार्यरत है। जब रेस्क्यू टीम खोदाई पूरी करने के बाद टनल बना कर राहुल के करीब पहुंची, तब हालात देखकर राहुल को बाहर निकालने का निर्णय लिया। यह जिम्मेदारी अजरूल हक को दी गई।  अजरूल को सेफ्टी बेल्ट पहनाकर मुंह के बल नीचे उतारा गया।
अजरूल ने बताया कि – नीचे उतरने पर देखा कि राहुल गड्ढे में लेटा है। मैने राहुल को उठाया और उसे सेफ्टी बेल्ट पहनाया और उसे बाहर निकाल लाया। जब मैं गड्ढे में उतरा तो उस समय मेरे जहन में एक ही बात थी कि मेरी जान भले ही चली जाए, पर बच्चे की जान बच जाए। इसी सोेच ने मुझे प्रेरणा दी और मुझे किसी प्रकार का डर नहीं लगा और मैं राहुल को बचा पाया।