द सीजी न्यूज 

विधानसभा में मंगलवार को हसदेव अरण्य क्षेत्र में आबंटित कोल ब्लॉक को रद्द करने का अशासकीय संकल्प मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सहमति के बाद सर्वसम्मति से पारित हुआ। यह संकल्प जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ विधायक धरमजीत सिंह ने प्रस्तुत किया था।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र, मिनीमाता बांगो डैम का जल ग्रहण क्षेत्र है। इससे कृषि क्षेत्र में सिंचाई के साथ ही कोरबा, जांजगीर के अलावा बिलासपुर और रायगढ़ जिले में पानी की आपूर्ति भी होती है। लेकिन यह सही नहीं है कि इस क्षेत्र में कोयला खनन होने से वनों का विनाश, बांध के जलग्रहण क्षमता पर विपरीत असर और मानव हाथी संघर्ष बढ़ेगा।

सीएम ने कहा कि सच यह है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में विभिन्न कम्पनियों को भारत सरकार द्वारा आबंटित कोल ब्लाकों में कोयला खनन अनुमति देने के पहले नियमानुसार वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा वन भूमि व्यपवर्तित की जाती है। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 अंतर्गत भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा खनन गतिविधियों हेतु स्वीकृत क्षेत्र के आसपास वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए भी अधिरोपित शर्तों के अधीन स्वीकृत योजना अनुसार क्षेत्र में वन्य प्राणी संरक्षण कार्य कराया जाता है ताकि पर्यावरणीय असंतुलन न हो।

हसदेव अरण्य कोल फिल्ड्स क्षेत्रान्तर्गत कुल 22 कोल ब्लॉक्स स्थित हैं जिनमें से 15 कोल ब्लॉक्स कोल माईन्स स्पेशल प्रोविजन एक्ट 2015 तथा 07 कोल ब्लॉक्स एमएमडीआर एक्ट, 1957 के तहत आवंटन के लिए चिन्हांकित है। वर्तमान समय में ऊर्जा उत्पादन का मुख्य स्रोत थर्मल पावर प्लांट है, जिसके लिए कच्चा माल के रूप में मुख्य सामग्री कोयला है। इसके बावजूद जनभावनाओं को देखते हुए हसदेव क्षेत्र में कोयला खदानों के आबंटन/संचालन के संबंध में प्रस्तुत अशासकीय संकल्प का सरकार समर्थन करती है।

इससे पूर्व सदन में विधायक धरमजीत सिंह ने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कोयला खनन होने से मानव हाथी संघर्ष बढ़ेगा। पर्यावरण को बेहद नुकसान होगा और हसदेव क्षेत्र का सुन्दर जंगल उजड़ जाएगा। छत्तीसगढ़ की वन संपदा, खनिज संपदा की रक्षा करना सबका कर्तव्य है। हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के लिए स्वीकृत खदानों के कारण लाखों वृक्ष कट जाएंगे और यहां का जंगल और उसकी खूबसूरती तबाह हो जाएगी।