कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉक के मुड़घुसरी पंचायत के आश्रित 111 आबादी के ग्राम बंजरिया के 9 सदस्यीय एक परिवार में 4 वयस्कों की तबियत 30 सितंबर को अचानक बिगड़ गई, जिसमें ससुर और बहू की जान चली गई है और दो लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में भर्ती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दोनों भर्ती मरीजों की हालत ख़तरे से बाहर है। इस घटना के तत्काल बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा त्वरित रूप से बंजरिया गाँव व आस-पास के गावों में सर्वे किया गया और बोड़ला सेक्टर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा सम्पूर्ण गाँव में शिविर लगाकर ग्रामवासियों की जाँच की गई। जाँच में सभी 109 ग्रामवासी स्वस्थ पाए गए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व ब्लॉक मेडिकल ऑफ़िसर बोडला द्वारा टीम सहित पहुँचविहीन बंजरिया गाँव में पहले कुछ किलो-मीटर मोटर-सायकल से और आख़री कुछ किलो-मीटर पैदल पहुँचकर ग्रामवासियों से स्थिति की जानकारी ली गई। सीएमएचओ ने बताया कि शुक्रवार 30 सितंबर को दोनों मृतकों की तबियत बिगड़ने के बाद इलाज कराने के बजाए अंधविश्वास के चलते परिवार पूरी रात झाड़-फ़ूँक करवाते रहे । मितानिन को भी इसकी सूचना देने से मना किया गया। इलाज के अभाव में दो की मौत हो गई।

दूसरे दिन 1 अक्टूबर शनिवार को एम्बुलेंस से 1 महिला और रविवार को परिवार के एक और सदस्य को, जो अंध-विश्वास के कारण दूसरे गाँव बावापथरा में जाकर रह रहे थे, स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा समझाईश देकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला लाकर भर्ती किया गया। इलाज के बाद  अब सभी ठीक महसूस कर रहे हैं। एहतियात के तौर पर उस घर के 3 छोटे बच्चों को भी चिकित्सालय में रखा गया है , हालांकि उन सभी में  बीमारी के कोई लक्षण मौजूद नहीं है। डाक्टरों का कहना है कि दूषित पेयजल से होने वाले मौसमी उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने पर सारा गाँव चपेट में आ जाता, लेकिन यहाँ केवल एक परिवार ही पीड़ित है। फ़ूड पॉइज़निंग ही इसका कारण हो सकता है।
कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देश पर पीएचई विभाग द्वारा गांव के एकमात्र बोरिंग के पानी का सैम्पल लेकर जांच किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सुजॉय मुखर्जी ने बताया कि गांव में सभी की स्थिति सामान्य है। दूषित भोजन के खाने से फुड पॉइजनिंग होता है और उचित समय में उपचार न कराने पर जान जाने का खतरा होता है।