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कलेक्टर रानू साहू की मां के घर ED का छापा, सुबह 5 बजे गरियाबंद के पाण्डुका पहुंची टीम : आदिवासी विकास की सहायक आयुक्त के दफ्तर और घर पर भी छापा

द सीजी न्यूज

छत्तीसगढ़ में आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई सहित दो कोल व्यापारियों के गिरफ्तारी के बाद अब ईडी टीम ने रायगढ़ कलेक्टर रानू साहू के पैतृक निवास गरियाबंद जिले के पंडुका में छापेमारी शुरू कर दी है। मंगलवार को सुबह ईडी की टीम ने उनके पैतृक निवास गरियाबंद पहुंचकर छापा मारा। टीम ने उनकी मां व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू और चचेरे भाई शैलेंद्र साहू के घर पर भी छापा मारा है। एक टीम ने कोरबा में आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त माया वारियर के दफ्तर पर भी छापा मारा है। रानू साहू वर्तमान में रायगढ़ में कलेक्टर हैं। इससे पहले वे कोरबा की कलेक्टर थी।

करीब 6 घंटे से ज्यादा समय से दोनों जगहों पर जांच जारी है। इससे पहले उनके सरकारी बंगले में ई़डी की टीम ने दबिश दी थी। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद से दोनों के घरों में दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। घर के गेट को बंद कर दिया गया है और सीआरपीएफ जवानों ने अपने कब्जे में ले रखा है। किसी को भी अंदर जाने और बाहर आने नहीं दिया जा रहा है। टीम पिछले 5 दिनों से छत्तीसगढ़ में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही है।

ईडी ने जारी किया था स्टेटमेंट

छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुलासा किया है कि छत्तीसगढ़ के खनिज विभाग ने खनिज परिवहन के ऑनलाइन सिस्टम को खत्म कर दिया गया था। मैनुअल सिस्टम के जरिए कोयला ट्रांसपोर्ट के लिए प्रति टन 25 रुपये के हिसाब से अवैध वसूली की जाती थी। इससे हर रोज 2 से 3 करोड़ रुपये की वसूली होती थी। डेढ़ साल में लगभग 500 करोड़ रुपये की अवैध वसूली कोयला परिवहन से हुई है। ईडी ने ट्वीट कर 6.5 करोड़ नगद, सोना और बेनामी संपत्ति के कागजात जब्त करने का दावा भी किया है। अभी भी प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में जारी है।

आईएएस रानू साहू पर कसा शिकंजा

रानू साहू 2010 बैच की IAS अधिकारी हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के पांडुका में जन्मी रानू साहू के पति जयप्रकाश मौर्य खनिज विभाग में मंत्रालय सचिव हैं। उनकी मां लक्ष्मी साहू जिला पंचायत सदस्य हैं जबकि पिता अरुण साहू की हार्डवेयर की दुकान है। उनकी एक बहन महिला बाल विकास की अधिकारी हैं। मूल रूप से छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के पांडुका को रहने वाली रानू साहू का सलेक्शन पहले राज्य पुलिस सेवा के लिए हुआ था। उन्होंने DSP पद पर ज्वाइनिंग दी थी। बाद में उन्होंने UPSC क्लियर किया और वो IAS बन गई। बालोद में कलेक्टर का पद संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय में कई अहम पदों पर काम किया। उन्होंने पर्यटन मंडल के साथ-साथ जीएसटी कमिश्नर की भी जिम्मेदारी संभाली। उसके बाद उन्हें कोरबा का कलेक्टर बनाया गया। कोरबा में 1 साल से ज्यादा वक्त तक पदस्थ रही कलेक्टर रानू साहू को अब रायगढ़ जैसे बड़े जिले की बागडोर सौंपी गई है।

मंत्री ने कार्यशैली पर उठाए थे सवाल

छत्तीसगढ़ के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल पूर्व में कोरबा जिले में रानू साहू के कलेक्टर कार्यकाल के दौरान उनके कामकाज पर नाराजगी जता चुके हैं। अग्रवाल ने उस समय कहा था कि कोरबा कलेक्टर की कार्यशैली हमेशा से विवादित ही रही है। ऐसा लगता है कि विवादों में घिरे रहना और विवादित काम करना उन्हें अच्छा लगता है। वे जहां भी रहीं और जिस विभाग में रहीं, विवादों में ही उलझी रहीं है। उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश के मुख्य सचिव से भी की। मंत्री ने कहा था कि कोरबा कलेक्टर रानू साहू के पदस्थ होने के बाद से ही उन्होंने उनसे बात नहीं की है। क्योंकि मैं उनकी कार्यप्रणाली से नाखुश हूं। विवाद से नाराज मंत्री ने कलेक्टर पर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप भी लगाए, उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की थी। रानू साहू पर बीजेपी विधायक सौरभ सिंह ने डीएमएफ में गड़बड़ी का आरोप लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास लिखित शिकायत भेजी थी।

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