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चुनाव के ऐलान के बाद भूपेश बघेल ने पाटन में 38 दिनों में 38 घंटे भी नहीं किया चुनाव प्रचार : आम जनता कह रही – हमारे कका हैं सबसे खास … रचेंगे जीत का नया इतिहास …

  • पूरे पाटन क्षेत्र में भूपेश कका के लिए गजब की दीवानगी
  • बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं ने भूपेश के कामकाज की सराहना की

द सीजी न्यूज

निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव का ऐलान 9 अक्टूबर को किया। पहले चरण का मतदान 7 नवंबर को और दूसरे चरण का मतदान 17 नवंबर को तय किया गया। पहले चरण के मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों को प्रचार के लिए 28 दिनों का समय मिला, जबकि दूसरे चरण के विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों को करीब 38 दिन का समय मिला। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में जुट गए। लेकिन …

फाइल फोटो – ग्रामीण की समस्या सुनते हुए भूपेश … आत्मीयता से ग्रामीण कंधे पर हाथ रखकर आश्वस्त किया कि फौरन समस्या का समाधान होगाकुल 90 विधानसभा क्षेत्रों वाले छत्तीसगढ़ में एक क्षेत्र ऐसा भी है, जहां 38 दिनों का समय मिलने के बावजूद एक प्रत्याशी ने अपने क्षेत्र में 38 घंटे भी प्रचार नहीं किया। गजब ये है कि क्षेत्र की जनता इस प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों से जिताने के लिए प्रतिबद्धता जता रही है।

जीत का नया रिकॉर्ड बनाकर नया इतिहास रचने की तैयारी कर रही है।

यह क्षेत्र है पाटन … प्रत्याशी का नाम है भूपेश बघेल … पूरे प्रदेश की जनता इन्हें भूपेश कका के नाम से जानती है।

पूरे पाटन क्षेत्र की सियासी हलचल का जायजा लेने हमने चार से पांच घंटे का समय पाटन एरिया में गुजारा। एक ही बात समझ आई कि कका के प्रति पाटन वालों की दीवानगी गजब की है।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की बातें छोड़िये … यहां की जनता बोल रही है रिकॉर्ड बनाबो, बाबू … रिकॉर्ड।

अमलेश्वर-पाटन रोड पर एक बुजुर्ग मिले। हमने सवाल कियाा तो जोश से बोले – भूपेश कका नई आए हे ता का हो गे… हमन करत हन चुनाव परचार … भूपेश बघेल हमर छत्तीसगढ़ के मुखिया हे … दूसर क्षेत्र म प्रचार करत हे …  हमन लड़त हन ओखर चुनाव … पाटन के जनता लड़त हे ओखर चुनाव … जीतबो … जीत के इतिहास बनाबो …

पाटन क्षेत्र के सांकरा गांव में चाय की गुमटी पर कई युवा चुनावी बहस में उलझे थे। बहस का मुद्दा यह नहीं था कि कांग्रेस और भाजपा में से किसकी जीत होगी ? बहस इस बात पर हो रही थी कि कका कितने वोट से जीतेंगे … एक युवा कह रहा था कि 35 से 40 हजार वोट से जीतेंगे। वहां मौजूद आधा दर्जन से ज्यादा युवा कहने लगे – 50 से ऊपर जाही कका के लीड …। जब हमने इस विषय पर अपने सवाल किये तो कुछ ही देर में युवक कहने लगे कि पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा लीड से चुनाव जीतेंगे।

दरअसल, पूरे पाटन क्षेत्र का अलग ही मिजाज देखने मिला। यहां राजनीति की बातें नहीं हो रही है… राजनीति के नाम पर सिर्फ कका की बातें हो रही है। यहां का मुद्दा भी केवल कका है। बहस कका की जीत के नए रिकॉर्ड को लेकर हो रही है। यहां विपक्ष की कोई चर्चा नहीं। न मोदी-शाह की इमेज का असर हो रहा है … न भाजपा का। कोई और मुद्दा भी नहीं है … कका की जीत कितने वोट से होगी? चर्चा इसी विषय से शुरू होती है और इसी पर खत्म हो जाती है? कोई और विषय नहीं … कोई और मुद्दा नहीं … विपक्ष के प्रत्याशी यहां पूरी तरह हाशिये पर हैं।  

पाटन के लोग गजब दिलवाले हैं। आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले पाटन के सेनानियों ने अपने देशभक्ति के जज्बे से पूरे देश का दिल जीता था। आज कका ने पूरे छत्तीसगढ़ के लोगों का दिल जीत लिया है।

दिलवालों की दरियादिली का ही नतीजा है कि 38 दिनों में 38 घंटे भी चुनाव प्रचार न करने के बावजूद भूपेश कका को यहां की जनता सिर आंखों पर बैठाए हुए है।

रिकॉर्ड मतों से जीत की तैयारी में जुटे हैं पाटन के बाशिंदे।

शायद देश-दुनिया को संदेश देने की तैयारी चल रही है …

कका जितने दिलवाले हैं … पाटन के लोग भी कम नहीं हैं …

वे कह रहे हैं – कका को जिताएंगे … जीत का नया रिकॉर्ड बनाएंगे … पूरे प्रदेश में जीत का नया इतिहास बनाएंगे … 

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