द सीजी न्यूज
अयोध्या से भाजपा की हार पार्टी के लिए बड़ा सदमा है। यहां से भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह के खिलाफ क्षेत्र में एंटी इन्कंबैंसी थी। लोगों की नाराजगी यहां के विकास मॉडल को लेकर थी। विकास के नाम पर यहां बुलडोजर चलाकर कई लोगों को उजाड़ दिया गया। इसमें बड़ी तादाद में हिंदू परिवार थे, जिनकी नाराजगी की तस्वीरें पहले भी आ चुकी है। यहां के उम्मीदवार के प्रति लोगों की नाराजगी हार का बड़ा कारण रहा।
भाजपा उम्मीदवार लगातार 10 साल से सांसद थे। उनको बदलने का दबाव स्थानीय स्तर के नेताओं की ओर से बनाया जा रहा था। इसके बाद भी भाजपा ने इस पर ध्यान नहीं दिया। भाजपा ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार हो गई। बीजेपी ने माना कि उम्मीदवार के चेहरे की जगह अयोध्या में पीएम मोदी का चेहरा चलेगा। यह सफल नहीं हो पाया।
लल्लू सिंह पर क्षेत्र में जमीन खरीद करने और फिर उसे ऊंचे दामों में बेचने का आरोप लगा। राम मंदिर पर फैसले के बाद जमीन खरीद-बिक्री का मामला जोर-शोर से उठा था। जातीय समीकरण को साधने में भी भाजपा सफल नहीं हो पाई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस सीट पर पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए को एकजुट करने में सफल हो गए। यह भाजपा की हार का कारण बन गई।
करोड़ों की विकास योजनाएं नहीं आई काम
अयोध्या में रामलला मंदिर के निर्माण के साथ करोड़ों की विकास योजनाओं को पूरा कराया गया। पिछले दिनों पीएम मोदी ने 15,700 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास-लोकार्पण किया था। अयोध्या में भव्य रेलवे स्टेशन का पुननिर्माण किया गया है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का विकास किया जा रहा है। अयोध्या रामलला मंदिर के साथ-साथ सड़कों से लेकर गलियों तक को दुरुस्त किया गया। लेकिन, यह सब अयोध्यावासियों को रास नहीं आया। अयोध्या में 2017 के बाद से हर साल दिवाली पर दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रकार के आयोजनों का भी प्रभाव नहीं दिखा। लोगों ने योगी सरकार के विकास मॉडल को खारिज कर दिया।
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