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6 लाख लेने के बाद भी नहीं कराई रजिस्ट्री, धोखाधड़ी का मामला दर्ज

द सीजी न्यूज

दुर्ग। चार साल पहले जमीन बेचने के नाम पर 6 लाख रुपए लेने के बाद आज तक रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इस मामले में कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। परिवादी बालकृष्ण स्वर्णकार (38), निवासी गया नगर, वार्ड क्रमांक 4, दुर्ग ने कोर्ट में शिकायत करते हुए बताया कि कन्हैयापुरी चौक कसारीडीह निवासी आरोपी राजूलाल (55) ने जमीन बेचने के नाम पर उनसे 6 लाख रुपए ले लिए।
बघेरा वार्ड क्रमांक 56 स्थित खसरा नंबर 323/107, रकबा 2500 वर्गफीट भूमि को 6 लाख रुपए में बेचने का सौदा तय हुआ था। 8 जनवरी 2021 को जिला न्यायालय परिसर दुर्ग में नोटरी के समक्ष, दो गवाहों की मौजूदगी में बिक्री इकरारनामा निष्पादित किया गया। इकरारनामे में जमीन विक्रय का स्पष्ट उल्लेख था और आरोपी के हस्ताक्षर भी दर्ज थे। इसी दिन आरोपी ने परिवादी के पक्ष में पंजीकृत आम मुख्त्यारनामा भी निष्पादित किया।
इकरारनामे के साथ परिवादी ने आरोपी को 1,95,000 रुपए का चेक और 5,000 रुपए कैश देकर कुल 2,00,000 रुपए की बयाना राशि अदा की। बाद में आरोपी ने कोविड महामारी का हवाला देते हुए रजिस्ट्री टाल दी और एक साल बाद शेष रकम लेकर रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया। जनवरी 2023 में परिवादी ने बाकी 4,00,000 रुपए की रकम भी दो चेक के माध्यम से आरोपी को दे दी।
परिवादी ने स्टाम्प ड्यूटी भरकर रजिस्ट्री की पूरी तैयारी कर दस्तावेज उप पंजीयक कार्यालय में प्रस्तुत किए, तब धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। आरोपी राजूलाल ने स्वयं उप पंजीयक कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई कि उसने जमीन बेची ही नहीं, बल्कि केवल गिरवी रखी थी। इस आपत्ति के कारण रजिस्ट्री रोक दी गई। दो वर्ष पूरे होने के बाद आम मुख्त्यारनामा भी निष्प्रभावी हो गया।
मामले से परेशान होकर परिवादी ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रवि कुमार महोबिया ने माना कि प्रथम दृष्टया यह संज्ञेय अपराध है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत थाने को केस दर्ज करने के निर्देश दिए।
कोर्ट के आदेश के बाद सिटी कोतवाली दुर्ग में आरोपी राजूलाल के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 416 (छलपूर्वक प्रतिरूपण) और धारा 34 (सामूहिक आशय) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान बैंक चेक, बैंक स्टेटमेंट, बिक्री इकरारनामा, आम मुख्त्यारनामा और नोटरी से जुड़े दस्तावेजों को अहम साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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