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भारत सरकार ने रुंगटा यूनिवर्सिटी में बनाया फैसिलिटेशन सेंटर, चार जिलों में छोटे उद्योगों को पेटेंट और ट्रेडमार्क की ट्रेनिंग

  • प्रशिक्षण अभियान के लिए मिला फंड

द सीजी न्यूज

भिलाई। दुर्ग संभाग के चार जिलों में कार्यरत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), छोटे उद्योगों और व्यवसाय करने वालों को बौद्धिक संपदा अधिकार यानी आईपीआर की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए भारत सरकार ने रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। यूनिवर्सिटी में आईपीआर फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किया गया है। दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद और नारायणपुर जिले में उद्योगों और व्यवसायियों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। आगामी माह प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत होगी। भारत सरकार के निर्देश अनुसार इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
एमएसएमई उद्योग धंधों को फायदा
इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि छोटे उद्योग, एमएसएमई इकाइयां और व्यापार करने वाले लोग अपने उत्पाद, ब्रांड नाम, लोगो, डिजाइन और नए आविष्कारों को सुरक्षित करना सीखें। कई व्यवसाय ऐसे हैं जिनका ट्रेडमार्क पंजीकृत नहीं है या जिनके पास कोई नया उत्पाद या तकनीक होने के बावजूद पेटेंट नहीं कराया गया है। जानकारी के अभाव में ऐसे उद्योग अपने ही नवाचार की सुरक्षा नहीं कर पाते और नुकसान उठाना पड़ता है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी समस्या को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में उद्योगों और व्यवसायियों को बहुत ही सरल भाषा में बताया जाएगा कि आईपीआर क्या होता है और यह व्यापार के लिए क्यों ज़रूरी है।
अधिकार करेंगे सुरक्षित
रुंगटा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ एजाजुद्दीन ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान समझाया जाएगा कि किसी उत्पाद, मशीन, प्रक्रिया, पैकेजिंग, ब्रांड नाम या डिजाइन को किस तरह कानूनी रूप से सुरक्षित किया जा सकता है। इससे व्यवसाय सुरक्षित रहेगा और बाजार में उसकी अलग पहचान बनी रहेगी। सरकार की ओर से पेटेंट, ट्रेडमार्क और अन्य अधिकारों के पंजीकरण के लिए किस प्रकार की आर्थिक सहायता उपलब्ध है, यह जानकारी दी जाएगी। इसमें आवेदन प्रक्रिया, ज़रूरी दस्तावेज और शुल्क में छूट या वापसी की जानकारी दी जाएगी, ताकि छोटे उद्योग बिना आर्थिक बोझ के अपने नवाचार को सुरक्षित कर सकें।
पूरी तरह निशुल्क ट्रेनिंग
यूनिवर्सिटी के डीन आरएंडडी डॉ.आरके राठौर ने बताया कि जब एमएसएमई और छोटे उद्योग आईपीआर को समझेंगे, तो वे नए उत्पाद बनाने, तकनीक सुधारने और बड़े बाजारों में आगे बढऩे के लिए आत्मविश्वास के साथ काम कर पाएंगे। इससे उद्योगों में नवाचार बढ़ेगा और स्थानीय व्यवसाय मज़बूत होंगे। चारों जिलों में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों की तारीख और स्थान उद्योग संघों और संबंधित संस्थानों के सहयोग से जल्द घोषित किए जाएँगे। इन कार्यक्रमों में भाग लेना पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा।
आईपीआर के अंतर्गत 6 अधिकार
आईपीआर के अंतर्गत मुख्य रूप से 6 अधिकार आते हैं। पेटेंट के तहत किसी नई खोज, तकनीक, मशीन या प्रक्रिया को सुरक्षा मिलती है, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति उसे बिना अनुमति इस्तेमाल नहीं कर सकता। ट्रेडमार्क किसी उत्पाद, संस्था या सेवा के नाम, लोगो और पहचान को सुरक्षित करता है, ताकि बाजार में उसकी अलग पहचान बनी रहे। कॉपीराइट किताब, शोध पत्र, लेख, संगीत, चित्र, वीडियो और शैक्षणिक सामग्री जैसे रचनात्मक कार्यों को सुरक्षा प्रदान करता है। औद्योगिक डिजाइन किसी उत्पाद की बनावट, आकार और बाहरी रूप को सुरक्षित करता है। भौगोलिक संकेत किसी विशेष क्षेत्र से जुड़े उत्पादों की पहचान को संरक्षण देता है। वहीं पौधा किस्म अधिकार नई विकसित फसल या पौधों की किस्म को सुरक्षा देता है।

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