- धमधा नाका एसएलआरएम सेंटर में अत्याधुनिक मशीनों से वैज्ञानिक तरीके से होगा वेस्ट मैनेजमेंट
द सीजी न्यूज
दुर्ग/ शहर में ठोस व सैनिटरी अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नगर निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत धमधा नाका स्थित एसएलआरएम (सॉलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट) सेंटर में अपशिष्ट प्रबंधन हेतु स्थापित ट्रामिल मशीन और सैनिटरी अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिये इंसिनरेटर मशीन का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार, आयुक्त सुमित अग्रवाल, सभापति श्याम शर्मा, एमआईसी सदस्य, पार्षद व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के बाद मशीनों को चालू कर नगर निगम की स्वच्छता व्यवस्था को नई दिशा दी गई। इस अवसर एमआईसी मेंबर नरेंद्र बंजारे, शेखर चंद्राकर, नीलेश अग्रवाल, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, काशीराम कोसरे, पार्षद रंजीता पाटिल, सावित्री दमाहे, मनीष कोठारी, गुलशन साहू सहित स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, कुणाल, राहुल के अलावा बड़ी संख्या में स्वच्छता दीदी मौजूद रही।
नगर निगम द्वारा स्थापित ट्रामिल मशीन के माध्यम से सूखे कचरे का शत-प्रतिशत पृथकीकरण कर उसका वैज्ञानिक निपटान किया जाएगा। इससे कचरे का आयतन कम होगा। परिवहन व भंडारण आसान होगा और पृथक किए गए कचरे का उपयोग कंपोस्ट निर्माण व पुनर्चक्रण के लिए किया जा सकेगा। ट्रामिल मशीन की लागत लगभग 1 करोड़ 62 लाख रुपये है।
2 नग इंसिनरेटर मशीनों के माध्यम से सैनिटरी नैपकिन, डायपर, बायो-मेडिकल व अन्य संक्रमण फैलाने वाले अपशिष्ट का उच्च तापमान पर भस्मीकरण कर सुरक्षित निपटान किया जाएगा। इससे बीमारियों के फैलने का खतरा कम होगा और स्वच्छता व स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। इंसिनरेटर मशीनों पर लगभग 70 लाख रुपये की लागत आई है।
इस पहल से शहर में कचरे के ढेर लगने, लैंडफिल साइटों के शीघ्र भरने और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में मदद मिलेगी। महापौर अलका बाघमार ने कहा कि नगर निगम द्वारा उठाया गया यह कदम स्वच्छ भारत मिशन और शहरी स्वच्छता लक्ष्यों के अनुरूप है। ट्रामिल और इंसिनरेटर मशीनों के संचालन से शहर को स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकेगा। उन्होंने नागरिकों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने में सहयोग करने की अपील की।
आयुक्त सुमित अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है। ट्रामिल मशीन से कचरे का वैज्ञानिक पृथक्करण कर उसे उपयोगी संसाधन में बदला जाएगा। इंसिनरेटर मशीन के माध्यम से सैनिटरी अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान किया जाएगा। भविष्य में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
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