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दुर्ग / आयोडीन मानव शरीर के संतुलित विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है। अगर शरीर में आयोडीन की कमी हो तो इससे कई तरह के रोग होने की आशंका बनी रहती है। यह जरूरी है कि शरीर में आयोडीन की कमी न होने पाए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को होने वाली स्वास्थ्यगत समस्याओं को ध्यान में रखकर शरीर में आयोडीन की कमी को पूरा करना चाहिए।
आयोडीन की कमी गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए बेहद घातक है। समाज में इसे लेकर सही जानकारी का काफी अभाव रहता है। इसके कारण आयोडीन अल्पता विकार एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। दुर्ग जिले में
98 प्रतिशत लोगों द्वारा राज्य में आयोडीन नमक का उपयोग किया जा रहा है। डॉक्टर भी ओपीडी में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को आयोडीन नमक खाने की सलाह ही देते हैं।
कैसे करें आयोडीन का उपयोग
लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, सुपेला के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीयम सिंह ने बताया, “आयोडीन युक्त नमक और खाद्य पदार्थों के सेवन के प्रति लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है। घर में आयोडीन नमक हमेशा एयर टाइट बंद डब्बे में रखना चाहिए। उपयोग के बाद डिब्बे का ढ़क्कन अच्छी तरह से बंद करना चाहिए, जिससे नमक में मौजूद आयोडीन हवा में वाष्पीकरण न हो जाए। सब्जी, दाल आदि में नमक का उपयोग करना चाहिए, जिससे आयोडीन का उपयोग मानक मात्रा के अनुसार शरीर में हो सकेगा।”
आयोडीन की कमी से गर्भवती महिला और बच्चों होता है इन बीमारियों का खतरा
आयोडीन की कमी का सर्वाधिक असर गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को होता है। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवजात शिशु का वजन कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं शिशु में आयोडीन की कमी से बौद्धिक और शारीरिक विकास समस्याएं जैसे मस्तिष्क का विकास धीमा होना, शरीर का कम विकसित होना, बौनापन, बोलने और सुनने की समस्या के साथ समझने में कमी हो सकती है।
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