
द हिंदू हडल मीट में सीएम बोले, नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मददगार
अमरीका से लौटने के बाद बैंगलुरू में आयोजित द हिंदू हडल मीट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना के महत्व को रेखांकित किया। भूपेश ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान और किसान एक दूसरे के पर्याय हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और पर्यावरण को बचाने के लिए नया आर्थिक माडल लागू किया है। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन की चुनौती का मुकाबला करने के साथ कृषि लागत में कमी लाने में सहायक है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र के विकास और औद्योगिक विकास के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने और प्रदूषण रोकने ग्रीन टेक्नोलॉजी के उपयोग को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया। बघेल ने कहा कि यह मॉडल देश के लिए मिसाल है। नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी योजना जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने में सहायक है। इससे कृषि लागत में कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि कृषि लागत में कमी आने पर किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। नरवा योजना के अंतर्गत प्रदेश के 30 हजार नालों में से 1024 नालों में वाटर रिचार्जिंग का काम शुरू किया गया है। प्रदूषणों के साथ भूमिगत जल के असंतुलित दोहन से धरती गर्म हो रही है। जलवायु परिवर्तन का असर छत्तीसगढ़ पर व्यापक रूप से पड़ा है। मानसूनी बारिश में कमी आई है। पहले 60 इंच बारिश होती थी जो अब 40 इंच रह गई है। जून में शुरू होने वाली बारिश अब जुलाई माह के आखिरी में शुरू होती है। इसका असर कृषि उत्पादन में और किसानों की क्रय शक्ति पर पड़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन को बढ़ाने और किसानों को भरपूर आमदनी देने के लिए सुराजी गांव योजना के कई घटकों का काम शुरू किया गया है। राज्य सरकार ने केन्द्रीय पूल में धान जमा करने और सर्वभौम पीडीएस के बाद अतिरिक्त धान से एथेनॉल बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर राज्य में उत्पादित अतिरिक्त अनाज से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देती है, तो किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिलेगा। बॉयो एथेनॉल संयंत्र लगाने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और फ्यूल पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
बघेल ने गरूवा योजना की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के 2 हजार गांवों में गौठान बनाए गए हैं। यहां पशुधन को एक साथ रखने की व्यवस्था है। इससे फसल चराई की समस्या दूर होगी। गौठान में पशुओं के नस्ल सुधार से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। गौठान में पशुओं के गोबर से कंपोस्ट और वर्मी खाद बनाने का काम शुरू हो गया है। इसका उपयोग जैविक खेती में करने से पौष्टिक आहार मिलेगा। पेस्टीसाइड्स और रासायनिक उर्वरकों से दूषित भोजन की जगह जैविक खेती के खाद्यान्न और कृषि उत्पाद प्राप्त होंगे, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहतर होंगे।
उन्होंने बताया कि किसानों के कृषि ऋण माफी, धान खरीदी की दर 2500 रूपए प्रति क्विंटल पर करने, तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा करने और सर्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 65 लाख परिवारों को 35 किलो चावल देने की योजना की जानकारी दी। बघेल ने कहा कि 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ करने और शहरों में 5 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री शुरू करने, जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन दर में कमी करने सहित अन्य फैसलों से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है।
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