द सीजी न्यूज
दुर्ग। लोकसभा चुनाव हो चुके हैं और 4 जून को नतीजे आ जाएंगे। इंतजार 4 जून का हो रहा है, लेकिन शहर की राजनीति से ताल्लुक रखने वाले तमाम नेता इस बात का आकलन अभी से करने लगे हैं कि नतीजों के बाद शहर की राजनीति किस तरह बदलेगी ? वजह ये है कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद से ही समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कहा जा रहा है कि शहर की कांग्रेसी राजनीति में अब सेकंड लाइन के नेताओं का दबदबा बढ़ेगा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र साहू, महापौर धीरज बाकलीवाल, निगम सभापति राजेश यादव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दीपक दुबे जैसे नेताओं का वर्चस्व बढ़ने के आसार बताए जा रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेताओं ने काफी मेहनत की। चिलचिलाती धूप में सुबह से देर रात तक ज्यादातर कांग्रेस नेता अपने प्रत्याशी राजेंद्र साहू को जिताने की मशक्कत करते रहे। खुद राजेंद्र साहू ने पूरे लोकसभा क्षेत्र का जिस धुआंधार तरीके से दौरा किया और सुबह से आधी रात तक चुनावी दौरे के साथ ही रणनीति बनाने और अलग-अलग स्तरों पर सामाजिक-राजनीतिक बैठकों में व्यस्त रहे, उससे चुनाव नतीजों के साथ ही कांग्रेस की राजनीति में बदलाव की चर्चा का दौर शुरू हो गया है।
दुर्ग लोकसभा चुनाव में दुर्ग में वार रूम इंचार्ज आरएन वर्मा और पूर्व विधायक अरुण वोरा अपनी-अपनी टीम के साथ व्यस्त रहे। ज्यादातर कांग्रेसियों का कहना है कि महापौर धीरज बाकलीवाल और निगम सभापति राजेश यादव और राजनांदगांव लोकसभा चुनाव में पीसीसी महामंत्री दीपक दुबे ने काफी मेहनत की है। चुनाव अभियान के दौरान इनके द्वारा किये गए कार्यों की काफी सराहना हो रही है।
दूसरी ओर, उन कांग्रेस नेताओं की राजनीति पर भी चर्चा हो रही है, जिन्होंने चुनाव प्रचार कम किया और फोटो खिंचवाने का काम ज्यादा किया। मीडिया और सोशल मीडिया में चुनाव प्रचार का दिखावा करने वाली फोटोबाजी में व्यस्त रहे।
कहा जा रहा है कि नतीजों के बाद कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा खुद की तस्वीर खिंचवाने पर फोकस करने वाले नेताओं की राजनीति पर ग्रहण लगने के आसार हैं। चुनाव प्रचार अभियान के दौरान एक सीनियर कांग्रेस नेता ने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र साहू को चुनाव जिताने के अभियान के बीच कुछ नेता अपनी राजनीति चमकाने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
बहरहाल, लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद शहर कांग्रेस के संगठन में बड़ा बदलाव हो सकता है। दुर्ग शहर में कांग्रेस की कमान कौन संभालेगा ? फैसले किसके कहने पर लिये जाएंगे ? और कांग्रेस की डोर थामने वाले हाथ कौन होंगे ? बदलाव होगा या पुराने ढर्रे पर कांग्रेस की राजनीति चलती रहेगी ? इन तमाम बातों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। ये सब कुछ चुनाव नतीजों के आंकड़ों पर ही निर्भर करेगा।
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