• आपके बनाए हुए ब्रीफकेस की चर्चा देश भर में हो रही : मुख्यमंत्री
  • भावुक हुई नोमिन पाल : ” कभी सोचा नहीं था कि मुख्यमंत्री हमें बुलाकर करेंगे सम्मानित”

द सीजी न्यूज डॉट कॉम

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले हफ्ते गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट की कापी लेकर आए थे। इस ब्रीफकेस की पूरे देश में चर्चा हो रही है। गोबर से ब्रीफकेस बनाने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं के लिए आज का दिन यादगार बन गया, जब खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में बुलाकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री से सम्मानित होने पर स्व सहायता समूह की दीदियां भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि कभी सोचा भी नहीं था कि उनके काम का सम्मान खुद मुख्यमंत्री करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व सहायता समूह की दीदियों नीलम अग्रवाल, नोमिन पाल, मनीषा पटवा, कांति यादव, लता पुणे को होली के त्योहार से पहले मिठाई भी भेंट की। मुख्यमंत्री ने दीदियों से कहा कि आपके द्वारा बनाए गए ब्रीफकेस की चर्चा पूरे देश भर में हो रही है आपका यह कार्य मौलिक होने के साथ ही  हमारे गोधन का भी सम्मान है।

नोमिन ने मुख्यमंत्री को बताया कि हम लोग गोबर से पेंट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। गोबर की ईंट बनाकर छत्तीसगढ़ महतारी का मंदिर बनाने की भी योजना है । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आपके प्रयासों में हम पूरा सहयोग करेंगे।

गौठान ने दिया कठिन वक्त में सहारा

समूह की नोमिन पाल ने बताया कि पति के निधन के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था। 6 महीने बहुत दिक्कत हुई। गौठान के जरिये गोबर से कई सामान बनाकर महीने में लगभग 15 हजार रुपये कमा लेते हैं। होली से पहले ही गोबर से निर्मित 150 किलो से ज्यादा गुलाल बेच चुके हैं। दिल्ली से भी गुलाल का आर्डर मिला है लेकिन समय की कमी के कारण  हमने मना कर दिया। गोबर की लकड़ी, दीये, मूर्ति, चप्पल भी बड़ी संख्या में बना रहे हैं।

गौरतलब है कि बजट ब्रीफकेस नगर निगम रायपुर के गोकुल धाम गोठान में कार्य करने वाली ‘एक पहल’ महिला स्व सहायता समूह की एसएचजी दीदी नोमिन पाल द्वारा बनाया गया था। ब्रीफकेस को गोबर, चूना पावडर, मैदा, लकड़ी और  ग्वार गम के मिक्चर को परत दर परत लगाकर 10 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है। इसमें लगे हैंडल और कार्नर कोंडागांव शहर में समूह द्वारा निर्मित बस्तर आर्ट कारीगर  से तैयार कराए गए है। इसी तकनीक से समूह द्वारा गोबर के खड़ाऊ (एक तरह की चप्पल ) भी बनाई जाती है।