द सीजी न्यूज
दुर्ग / इंदिरा मार्केट स्थित कुँए में कई साल से कचरा डंप करने के कारण यह कुँआ मृतप्राय हो चुका था और वाटर रिचार्जिंग की संभावना समाप्त हो गई थी। नगर निगम दुर्ग की टीम ने इस कुंए सफाई का संकल्प लिया और पहली बार पूरी तरह इस कुंए की सफाई कर ली गई है।

निगम अफसरों ने बताया कि जब निगम की टीम कुंआ साफ करने पहुंची तो कुएं की गहराई में गैस की आशंका होने से सफाई कर्मियों की जान का खतरा था। कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के निर्देश पर सेमी रोबोटिक मशीन से इसकी सफाई कराई गई। रायपुर से इस कार्य के विशेषज्ञों को बुलाया गया।

विशेषज्ञों ने देखा कि कुँए के भीतर काफी गैस है। कुंए में सेमी रोबोटिक मशीन से साफ सफाई कराई गई। साफ-सफाई के बाद अब यह कुंआ बिल्कुल साफ है और रिचार्ज के लिए तैयार है। कुंए के पानी की क्वालिटी भी चेक करने पर पीने योग्य बताया गया है। पानी का पीएच संतुलित है।

नगर निगम कमिश्नर हरेश मंडावी ने बताया कि शहर के भीतर के कुंओं को पुनर्जीवित करने के लिए काम किया जा रहा है। इंदिरा मार्केट का कुँआ पहला कुंआ है। अभी 15 और कुंओं को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा 30 तालाबों का चिन्हांकन भी किया गया है। इनकी साफ-सफाई की जाएगी, ताकि बेहतर तरीके से वाटर रिचार्ज किया जा सके।

विधायक अरुण वोरा ने कहा कि वाटर रिचार्ज के कार्यों से नगर में भूमिगत जल का स्तर बढ़ेगा और जल को सहेजने में बड़ी मदद मिलेगी। महापौर धीरज बाकलीवाल ने कहा कि हम अपने जलस्रोतों का जितना संरक्षण करेंगे, उतना ही भविष्य के संकटों से निपट पाएंगे।

कुंओं के माध्यम से जल सहेजने का इतिहास प्राचीन, रायपुर के रींवा में भी मिले रिंग वेल
भारत में पहले शहर नदियों के किनारे बसते थे ताकि जलस्रोतों की किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। ईसा की तीसरी सदी पूर्व जब मौर्य काल में बड़े पैमाने पर नगरों का विकास हुआ तो कुँओं की अधिक जरूरत महसूस हुई। इससे भारत में रिंग वेल कुँओं का विकास हुआ। अभी आरंग के पास रींवा में जो खुदाई चल रही है, उसमें रिंग वेल प्राप्त हुए हैं। इस तरह छत्तीसगढ़ में भी उसी परंपरा को अपनाया गया।
THE CG NEWS | Online hindi news in chhattisgarh Online hindi news portal