द सीजी न्यूज
बोरवेल में फंसे राहुल को बचाने के लिए रेस्क्यू दल ने चार दिनों तक कई बार बेहद कड़ी चुनौतियों का सामना किया। राहुल के रेस्क्यू अभियान में बड़े-बड़े चट्टान बाधा बनकर रोड़ा अटकाते रहे। 65 फीट नीचे गहराई में जाकर होरिजेंटल सुरंग तैयार करने और राहुल तक पहुँचने में सिर्फ चट्टानों की वजह से ही 4 दिन लग गए। रेस्क्यू टीम को भारी गर्मी और उमस के बीच झुककर, लेटकर टार्च की रोशनी में भी काम करना पड़ा।
इसके बावजूद अभियान न तो खत्म हुआ और न ही जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे राहुल ने हार मानी। बोर का वाटर लेवल कई बार बढ़ा। इसे कम करने के लिए गांव के सभी बोर वेल को चालू कराया गया ताकि पानी बहाकर भूजल स्तर कम रखा जा सके। रेस्क्यू टीम को कई बार अपना प्लान बदलने के साथ नई-नई चुनौतियों से जूझना पड़ा। मशीनें बदलनी पड़ी।
भारतीय सेना के कर्नल चिन्मय पारीक की टीम के साथ कटक और भिलाई की टीम दिन-रात डटी रही
जांजगीर-चाम्पा जिले के अंतर्गत मालखरौदा ब्लॉक के ग्राम पिहरीद में 11 वर्षीय बालक राहुल साहू अपने घर के पास खुले हुए बोरवेल में गिरकर फंस गया था। 10 जून को दोपहर लगभग 2 बजे अचानक घटी इस घटना की खबर मिलते ही जिला प्रशासन की टीम कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला के नेतृत्व में तैनात हो गई। समय रहते ही ऑक्सीजन की व्यवस्था कर बच्चे तक पहुंचाई गई। कैमरा लगाकर बच्चे की गतिविधियों पर नज़र रखने के साथ उनके परिजनों के माध्यम से बोरवेल में फंसे राहुल पर नजर रखने के साथ उनका मनोबल बढ़ाया जा रहा था। उसे जूस, केला और अन्य खाद्य सामग्रियां भी दी गई।
विशेष कैमरे से पल-पल की निगरानी रखने के साथ ऑक्सीजन की सप्लाई भी की गई। आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और एम्बुलेंस भी तैनात किए गए। राज्य आपदा प्रबंधन टीम के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (एनडीआरएफ) की टीम ओडिशा के कटक और भिलाई से आकर रेस्क्यू में जुटी थी। भारतीय सेना के कर्नल चिन्मय पारीक अपने टीम के साथ इस मिशन में जुटे थे। रेस्क्यू से बच्चे को सकुशल निकालने के लिए हर सम्भव कोशिश की गई।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बोरवेल में फंसे राहुल को सुरक्षित निकालने के लिए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश दिए थे। आखिरकार देश के सबसे बड़े रेस्क्यू अभियान को कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला के नेतृत्व में सफलता के साथ पूरा कर लिया गया। 105 घण्टे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद बोरवेल में फंसे राहुल को आखिरकार सकुशल बाहर निकाल लिया गया। राहुल के बचाव के लिए लगभग 65 फीट नीचे गड्ढे में उतरी रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद राहुल को सुरक्षित बाहर निकाला। राहुल जैसे ही सुरंग से बाहर आया। उसने आँखे खोली और एक बार फिर दुनिया को देखा। यह क्षण सबके लिए खुशी का एक बड़ा पल था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राहुल को तत्काल ही बेहतर उपचार के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अपोलो अस्पताल बिलासपुर भेज गया। बहरहाल राहुल साहू के सकुशल बाहर निकाल लिए जाने से सभी ने राहत की सांस ली।
देश के सबसे बड़े रेस्क्यू अभियान के पहले दिन 10 जून की रात में ही राहुल को मैनुअल क्रेन के माध्यम से रस्सी से बाहर लाने की कोशिश की गई। राहुल द्वारा रस्सी को पकड़ने जैसी कोई प्रतिक्रिया न देने पर परिजनों की सहमति और एनडीआरएफ के निर्णय के बाद तय किया गया कि बोरवेल के किनारे तक खुदाई कर रेस्क्यू किया जाए। रात लगभग 12 बजे से पुनः अलग-अलग मशीनों से खुदाई शुरू की गई। लगभग 60 फीट की खुदाई किए जाने के बाद एनडीआरएफ और सेना के साथ जिला प्रशासन की टीम ने ड्रीलिंग करके बोरवेल तक पहुंचने सुरंग तैयार की। सुरंग बनाने के दौरान कई बार मजबूत चट्टान आने से अभियान में बाधा आई।
बिलासपुर से अधिक क्षमता वाली ड्रिलिंग मशीन मंगाने के बाद बहुत एहतियात बरतते हुए काफी मशक्कत के साथ राहुल तक पहुंचा जा सका। राहुल के पिता लाला साहू, माता गीता साहू सहित परिजनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कलेक्टर, जिला प्रशासन के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और एनडीआरएफ, सेना, एसडीआरएफ सहित सभी को तहे दिल से आभार माना है।
कलेक्टर सहित सभी अफसर दिन-रात रहे मुस्तैद
राहुल के सलामती के लिए जहाँ दिन-रात पर दुआओं का दौर चला। वहीं घटनास्थल पर इस ऑपरेशन के पूरा होने तक कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला, पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित तमाम अफसर रात भर घटनास्थल पर रेस्क्यू पर निगरानी रखे हुए थे। राहुल के सकुशल बाहर आने की घटना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं थी। कलेक्टर शुक्ला ने कहा कि बोरवेल में फँसे होने की वजह से बालक का रेस्क्यू बहुत ही दुष्कर कार्य था। विपरीत परिस्थितियों के कारण जो भी संभव था, वह फ़ैसला एनडीआरएफ और परिजनों के साथ मिलकर लिया गया। कलेक्टर ने इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए जिले के अधिकारियों सहित आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी स्थान पर बोरवेल को खुला न रखे। अपने छोटे बच्चों को ऐसे स्थानों पर कतई न जाने दें और स्वयं भी अपने बच्चों को निगरानी में रखे।
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