- फाइलों में ही चल रही है लैब निर्माण की योजना
- दो साल में टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई
द सीजी न्यूज
नवा रायपुर में फूड टेस्टिंग लैब निर्माण की सिर्फ ढपली बज रही है, काम कुछ नहीं हो पा रहा है। पिछले दो साल से फूड टेस्टिंग लैब के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। कछुआचाल से अपनाई जा रही प्रक्रिया के कारण अब तक टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई है। छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाऊसिंग कार्पोरेशन के चेयरमेन अरुण वोरा ने आज कार्पोरेशन मुख्यालय में फूड टेस्टिंग लैब निर्माण की प्रक्रिया में हो रही लेटलतीफी को लेकर जमकर नाराजगी जताई।
वोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप नवा रायपुर में मध्य भारत के पहले फूड टेस्टिंग लैब का निर्माण कराना प्रस्तावित है। इसके निर्माण की प्रक्रिया में पहले ही काफी विलंब किया जा चुका है। अब टेंडर प्रक्रिया में विलंब किया जा रहा है। वोरा ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएं ताकि लैब निर्माण कार्य का भूमिपूजन मुख्यमंत्री से कराया जा सके। भूमिपूजन के बाद लैब का निर्माण प्रारंभ किया जाएगा।
कार्पोरेशन के अधिकारियों ने वोरा को बताया कि लैब निर्माण के लिए करीब डेढ़ एकड़ भूमि का आवंटन हो चुका है। लैब का निर्माण एनआरडीए द्वारा किया जाएगा। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। लैब स्थापित करने में लगभग 19 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वोरा ने सभी प्रक्रियाएं शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिये।
फूड टेस्टिंग लैब से ये सुविधा मिलेगी
छत्तीसगढ़ राज्य के गोदामों में स्टोर किए गए चावल के अलावा राज्य में बिकने वाली खाद्य सामग्री जैसे मिठाई, पैकेज्ड फूड आइटम सहित सभी प्रकार की खाद्य सामग्री की जांच नवा रायपुर स्थित लैब में हो सकेगी। अभी तक राज्य में फूड टेस्टिंग लैब न होने के कारण खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने दूसरे राज्यों के लैब में भेजना पड़ता है। इसकी जांच रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। राज्य में फूड टेस्टिंग लैब का निर्माण होने पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच रायपुर में ही हो सकेगी। इससे समय और धन की बचत होगी। गुणवत्ताहीन खाद्य सामग्री की बिक्री, सप्लाई आदि पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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