- बीएड कोर्स की इंटर्नशिप कर रहे लोगों के भरोसे चल रही है पढ़ाई
- शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के तीन माह बाद भी शिक्षकों को पदस्थ नहीं किया
- आखिरकार इस अव्यवस्था के लिए कौन है जिम्मेदार ?
- सत्तापक्ष स्वामी आत्मानंद स्कूलों पर आत्ममुग्ध, अव्यवस्था पर विपक्ष ने साधा मौन
द सीजी न्यूज

पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में भले ही स्वामी आत्मानंद स्कूलों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था का ढोल पीटा जा रहा हो, लेकिन सच यही है कि राज्य की शिक्षण व्यवस्था का दूसरा चेहरा भी है जो बदहाल है। इस अव्यवस्था पर किसी का भी ध्यान नहीं है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों को छत्तीसगढ़ की शिक्षा का भूपेश मॉडल बताने वाले सरकारी सिस्टम को इन स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की दुर्गति होने की जरा भी फिक्र नहीं है। अगर फिक्र होती तो पढ़ाई की दुर्गति नहीं होती।
दुर्ग शहर के दीपक नगर में शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल कई दशकों से चल रहा है। शहर का एकमात्र स्वामी आत्मानंद स्कूल इसी स्कूल में खोला गया है। स्वामी आत्मानंद स्कूल की पढ़ाई के साथ ही यहां पूर्व से चल रही हिंदी माध्यम की कक्षाएं भी चल रही हैं। पिछले साल स्वामी आत्मानंद स्कूल खुलने की घोषणा के साथ ही इस हिंदी माध्यम स्कूल की शिक्षण व्यवस्था की दुर्गति हो गई।
स्कूल परिसर में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल का नया भवन बन रहा है। यहां पहले से संचालित हिंदी माध्यम स्कूल में कक्षा 9 से 12 के हिंदी माध्यम के करीब डेढ़ सौ स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। ये विद्यार्थी आर्ट्स, कॉमर्स, बॉयोलाजी और मैथ्स विषय लेकर पढ़ रहे हैं। सरकार की शिक्षा व्यवस्था की दुर्गति का आलम ये है कि क्लास 9 से लेकर क्लास 12 तक के लिए सिर्फ और केवल सिर्फ दो टीचर हैं। एक टीचर बायोलाजी पढ़ाती हैं और दूसरी टीचर गणित विषय। केमेस्ट्री, फिजिक्स के टीचर ही नहीं हैं। कॉमर्स, आर्ट्स के टीचर भी नहीं हैं। इंग्लिश जैसे विषय के टीचर भी नहीं।
यानी शिक्षण व्यवस्था का पूरी तरह भट्ठा बैठ चुका है।
पर किसे फिक्र है?
गुरुवार को विधायक अरुण वोरा ने जब नए स्कूल भवन निर्माण का निरीक्षण किया तो स्टूडेंट्स और शिक्षकों ने इस समस्या से अवगत कराया। वोरा ने कलेक्टर और डीईओ से चर्चा करने का आश्वासन दिया। ये अलग बात है कि इस आश्वासन के सिवा कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्टूडेंट्स ने वोरा को याद दिलाया कि डेढ़ माह पहले भी उन्हें इस समस्या की जानकारी दी गई थी। लेकिन, उस समय से लेकर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
छात्राओं ने बताया कि स्कूल में सब्जेक्ट टीचर ही नहीं हैं। बीएड का कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स इंटर्नशिप के लिए अध्यापन कराने आते हैं। वही लोग क्लास ले रहे हैं। वो पढ़ाते हैं, लेकिन कुछ भी समझ नहीं आता। पूरी पढ़ाई चौपट हो गई है। भविष्य अंधकारमय हो गया है।
जब स्कूल स्टाफ से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि हिंदी माध्यम स्कूल के अधिकांश टीचर्स का तबादला कर दिया गया है। कई टीचर्स की ड्यूटी स्वामी आत्मानंद स्कूल में लगाई गई है तो कई टीचर्स को दूसरे स्कूल में भेज देने के कारण यहां की शिक्षण व्यवस्था का हाल बेहाल हो गया है। जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी को टीचर्स स्टाफ की कमी होने के बारे में पूरी जानकारी है, लेकिन उन्होंने भी इस अव्यवस्था पर आंखे मूंद रखी है।
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