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आभार सम्मेलन में सीएम भूपेश बघेल का बड़ा ऐलान : पांच हजार आंगनबाड़ी भवन बनेंगे : महिला समूहों को अब 6 लाख रुपए तक लोन

 

  • प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आई महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों, मितानिनों, आंगनबाड़ी सहायिकाओं ने गजमाला से मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया

द सीजी न्यूज

आभार सम्मेलन में सीएम भूपेश बघेल ने कई बड़े ऐलान करते हुए कहा कि 5000 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाएगा। पूरे प्रदेश में 14 नवंबर को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका का सम्मान किया जाएगा। सक्षम योजना के अंतर्गत 1 लाख वार्षिक आय की सीमा को बढ़ाकर दो लाख किया जाएगा। महिला स्व सहायता समूह को अधिकतम 4 लाख ऋण की सीमा को  बढ़ाकर 6 लाख रूपए किया जाएगा। सम्मेलन में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेडिया, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चेयरमेन विधायक कुलदीप जुनेजा, विधायक धनेंद्र साहू, खनिज निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, रायपुर नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

सीएम ने कहा कि हमारी बहनें जहां भी मिलती थीं, कहती थीं कि एक कार्यक्रम कराइए, हम सब आपको धन्यवाद देना चाहते हैं। आज साइंस कालेज मैदान में हजारों की तादाद में आई हैं, मैं आज आपका आभार व्यक्त करता हूं। सीएम ने कहा कि आपने बिना किसी संकोच के जिन परिस्थितियों में काम किया है, उसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं। आपने सरकार के प्रति जो आभार प्रकट किया, ये आभार हमारा नहीं बल्कि मैं आप सभी को पौने तीन करोड़ जनता की ओर से मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूं।

आभार सम्मेलन
सीएम ने कहा कि आपका काम मानवता की सेवा है और इससे बड़ा कोई धर्म नहीं है। पूरे देश में अकेला छत्तीसगढ़ है जहां सरकार ने निर्णय लिया कि मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हाथ में कोरोना किट में पहुंचाया जाए। आठ दिन के भीतर ही कोरोना नियंत्रित होना शुरू हो गया। कोरोना काल में ऐसा कोई वर्ग नहीं है  जिससे मैने बात नहीं की है। आप लोगों ने साहस व धैर्य के साथ जो काम किया है उसके लिए मैं आपको बधाई देता हूं। हमारी बहनों की वजह से कुपोषण 37 फीसदी से घटकर 31 फीसदी हो गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती है जिसमें आप बहनों के सहयोग की अपेक्षा होगी। जिस प्रकार से कुपोषण के खिलाफ आपने लड़ाई लड़ी, उसी प्रकार से हमने मलेरिया के खिलाफ संघर्ष किया है। छत्तीसगढ़ में कभी लिंग भेद नहीं रहा और केरल के बाद हमारा प्रदेश दूसरे स्थान पर है। यहां कभी भी बेटियों को बोझ नहीं समझा गया, आज महिलाएं घर की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में लगी हुई हैं। हमने शासकीय कर्मियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू किया है।

श्रमिकों को भी 7000 सालाना देने की शुरूआत की है। बेरोजगार साथियों को हम 2500 रूपए प्रतिमाह दे रहे हैं। मई दिवस पर हमने श्रमिकों के लिए बड़े फैसले लिए हैं। श्रमिक, शासकीय कर्मचारी, किसान व  बहनों के सम्मान में हमने कोई कसर नहीं छोड़ा है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित सामानों की प्रदर्शनी और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं से संबंधित स्टॉल का निरीक्षण किया।

 

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