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हीट वेव से बचें : सावधानी बरतना जरूरी

द सीजी न्यूज

राजनांदगांव। हीट वेव ( सामान्य भाषा में लू चलना कहा जाता है) से बचने सावधानी बरतना जरूरी है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फॉरेन्हाइट से ज्यादा हो, तो हीट वेव की स्थिति उत्पन्न होती है। इसका असर बच्चों, बुुजुर्गों और कोमार्बिड लोगों में सबसे ज्यादा होता है। हमारे शरीर के टेम्परेचर रेग्यूलेशन (तापमान नियंत्रण) मस्तिष्क के हाईपोथलेमस भाग से होता है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फॉरेन्हाइट से अधिक हो जाता है। तब टेम्परेचर रेग्यूलेशन तंत्र प्रभावित होता है। परिणाम स्वरूप तब हीट स्ट्रोक की स्थिति उत्पन्न होती है।

लक्षण –
सिर में भारीपन और दर्द का अनुभव होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, अधिक प्यास लगना और पेशाब कम आना, भूख कम लगना, बेहोश होना।

लू से बचाव के उपाय –
बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर न जाएं। धूप में निकलने से पहले सिर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बांध लें। पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए। मौसमी फल जैसे तरबूज, ककड़ी, छाछ, लस्सी समय-समय पर लेते रहें। गर्मी के दौरान नरम, मुलायम सूती के कपड़े पहनने चाहिए, जिससे हवा और कपड़े पसीने को सोखते रहें। अधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस घोल पीना चाहिए। चक्कर आने पर छायादार स्थान पर आराम करें और शीतल पेयजल या फल का रस लस्सी, मठा आदि का सेवन करें। प्रारंभिक सलाह के लिए 104 आरोग्य सेवा केन्द्र से नि:शुल्क परामर्श लें और उल्टी, सिरदर्द, बुखार की दशा में निकट के अस्पताल या स्वास्थ्य केन्द्र में जरूरी सलाह लें।

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