द सीजी न्यूज
दिल्ली में सोमवार देर रात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर चार घंटे चली बैठक के बाद राजस्थान कांग्रेस के झगड़े को सुलझाने पर सहमति बन गई। खड़गे के घर सचिन पायलट और अशोक गहलोत को साथ बैठाकर सियासी गिले-शिकवे दूर किये गए। दोनों से अलग-अलग भी बैठक हुई। बाद में संगठन महासचिव केसी वेणुगापोल ने दोनों नेताओं को मीडिया के सामने लाकर एकजुटता के साथ चुनाव लड़ने की घोषणा की।
पायलट ने दिया था अल्टीमेटम
सचिन पायलट ने पेपर लीक और बीजेपी राज के करप्शन के खिलाफ 11 मई से अजमेर से जयपुर के बीच पैदल यात्रा की थी। 15 मई को यात्रा के समापन पर जयपुर के महापुरा में की गई सभा में पायलट ने तीन मांगें रखकर 15 दिन में कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया। पायलट ने पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे की सरकार के करप्शन पर हाईलेवल कमेटी बनाने, आरपीएससी को भंग कर पुनर्गठन करने और पेपर लीक से प्रभावित बेरोजगारों को मुआवजा देने की मांग रखी थी। तीनों मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी। पायलट के अल्टीमेटम को 30 मई को 15 दिन पूरे हो गए। इससे पहले सुलह हो गई। हालांकि, अब तक तीनों में से किसी मांग को सरकार ने नहीं माना है।
अपनी यात्रा के दौरान पायलट ने कई बार कहा था कि उनकी मांगों पर सरकार को रास्ता निकालना है, पार्टी को नहीं। सीएम अशोक गहलोत उनकी मुआवजे की मांग को बुद्धि का दिवालियापन कह चुके हैं।
गहलोत ने मीडिया से कहा, ‘मैं खुद कई बार कह चुका हूं कि अब मेरे लिए पद मायने नहीं रखता है। मैं तीन बार सीएम बना हूं, केंद्रीय मंत्री बना हूं। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने मुझ पर इतना विश्वास किया है। तीन बार सीएम बनना मायने रखता है। तीन बार केंद्रीय मंत्री बनना मायने रखता है। आज मेरी ड्यूटी बनती है कि जो हाईकमान चाहे वह मैं करूं, पार्टी को जितवाने के लिए काम करूं, वो मैं कर रहा हूं। मैंने योजनाएं बनाने में और लागू करने में कोई कमी नहीं रखी। हर वर्ग का ध्यान रखा है। अब राजस्थान में चाहे मोदी आएं या अमित शाह आएं, जनता हकीकत जानती है।’
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