द सीजी न्यूज
दुुर्ग। दुर्ग शहर के निवर्तमान विधायक अरुण वोरा ने जनादेश को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हुए संकल्प व्यक्त किया है कि वे पूरे मनोयोग से दुर्ग क्षेत्र की सेवा करते रहेंगे। वोरा ने अपने पिताश्री स्व. मोतीलाल वोरा के ध्येय वाक्य को अपने राजनीतिक जीवन का मूलमंत्र बताया कि ‘पद आते हैं और चले जाते हैं, और पद आने-जाने के बाद में आदमी को हमेशा विनम्र रहना चाहिए।’
वोरा ने कहा कि चुनाव में वे आजीवन दुर्ग शहरवासियों की सेवा करते रहेंगे। दुर्ग हमारा परिवार है। इससे हमारा नाता 55 वर्षों से है और अपने परिवार का सदस्य मानकर दुर्ग शहरवासियों ने हमेशा स्नेह और प्रेम दिया है। इस प्रेम में कहीं कमी नहीं आई है। चुनाव के नतीजे चाहे जो भी हो। वोरा ने कहा, ‘मुझे पहले भी असफलता मिली है, लेकिन मैंने दुर्गवासियों को कभी नहीं छोड़ा। ‘बाबूजी ‘ जीवन पर्यंत दुर्ग के साथ रहे, चाहे वह किसी भी पद पर रहे हों, लेकिन दुर्ग को कभी उन्होंने नहीं भुलाया।‘
वोरा ने कहा कि जिन्होंने चुनाव में उनका साथ दिया है, उनका दिल से आभार व्यक्त करते हैं। जिन्होंने साथ नहीं दिया या नहीं दे पाए हों तो उनका भी आभार मानते हैं। वोरा ने कहा, ‘मेरे प्रयासों में कुछ कमी रह गई होगी, जिसके कारण मैं नहीं सफल हो सका। मैं हमेशा इस बात को कहता रहा हूं कि एक सच्चा जनप्रतिनिधि वही होता है जो अपने मतदाताओं की भावनाओं की कसौटी पर खरा उतरता है और जो खरा नहीं उतरता, वह सही मायने में जनप्रतिनिधि नहीं होता।
वोरा ने कहा कि हो सकता है, कोई गलती हुई होगी, उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं, लेकिन मैं ऐसा कोई कार्य कभी नहीं करूंगा, जिससे दुर्ग के मतदाताओं को यह लगे कि हमारा प्रतिनिधि हमारी भावनाओं का सम्मान नहीं करता है।’ भीतरघात और खुलाघात को लेकर वोरा ने कहा कि वे मानते हैं कि सबने उनका साथ दिया है और जिन्होंने भीतरघात या खुलाघात किया होगा तो उनका दिल जानता है। मैं उनके लिए कुछ नहीं कह सकता। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के साथ कोई छल-प्रपंच होता है तो इसकी सजा उन्हें ईश्वर ही देगा।
नव निर्वाचित विधायक गजेंद्र यादव के लिए भी अरुण वोरा ने एक सकारात्मक संदेश देते हुए कहा कि क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिसके लिए उन्हें अधिकतम प्रयास करने होंगे।
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