द सीजी न्यूज
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किये गए। 75 पार का नारा देने के बाद चुनाव में करारी पराजय से पूरी कांग्रेस पार्टी कोमा में चली गई है। समूचे संगठन का तानाबाना बिखर गया है। हालत ये है कि पूरा एक महीना बीतने के बावजूद अभी तक हार की समीक्षा तक नहीं हुई है। प्रादेशिक स्तर पर सिर्फ एक दफा आधी-अधूरी समीक्षा की गई। प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारी जिला स्तर पर समीक्षा करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए हैं। पूरा संगठन कछुआचाल से चल रहा है। शायद कछुए से भी सुस्त … धीमा … उनींदा सा …
देश के सबसे प्रमुख विपक्षी दल कहे जाने वाले कांग्रेस पार्टी के नेता छत्तीसगढ़ में पता नहीं किस कुंभकर्णी नींद में सोए पड़े हैं। लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। इसके बावजूद पार्टी में सन्नाटा पसरा है। कांग्रेस के एक प्रादेशिक पदाधिकारी से हाल ही में चर्चा हुई। कांग्रेस की निष्क्रियता को लेकर चर्चा के जवाब में उन्होंने कहा – अभी तो पांच साल हैं … संगठन का कामकाज सुधर जाएगा … अभी तो तेल देखना है, तेल की धार देखना है … इतनी जल्दबाजी क्यों करें ?
अब सवाल ये है कि इस जवाब के क्या मायने हैं ?
क्या प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाना ही एकमात्र मिशन है ? क्या लोकसभा चुनाव जीतने की कांग्रेसियों की कोई मंशा नहीं है ?
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के साथ थोक के भाव में नियुक्त किये गए प्रदेश कांग्रेस के संगठन पदाधिकारी पराजय के बाद आखिर किस गुफा में घुस गए हैं।
पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सीएम हाउस में सक्रिय रहकर पॉवर दिखाने वाले नेता कहां विलुप्त हो गए ???
सत्ता सुख भोगने वाले कांग्रेस नेता किस बिल में घुसे हैं ???
करोड़ों रुपए के घोटाले, कमीशनखोरी, दलाली करने वाले नेताओं की फौज आखिर कहां गई ???
बड़ा सवाल ये है कि सत्ता हासिल होने के बाद पांच साल तक अहंकार में डूबे रहे कांग्रेस नेताओं को भाजपा की सरकार बनते ही आखिर किस बात का खौफ है ??? लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा पर हमलावर क्यों नहीं हो रहे वो तमाम कांग्रेस नेता ??? खरगे या राहुल गांधी के राजनीतिक मुस्तकबिल की फिक्र क्यों नहीं है उन कांग्रेस नेताओं को ??? सत्ता की मलाई खाते हुए अहंकार और घमंड में चूर रहने वाले कांग्रेस नेताओं की जमात ने सत्ता जाते ही पार्टी की सुध क्यों नहीं ली ? क्या उनका रोल सिर्फ पार्टी को चारागाह समझकर चरना ही रह गया है।
अलबत्ता … कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता जहां था … वहीं खड़ा है … मोर्चे पर डटे रहने के लिए मुस्तैद खड़ा है … उसे पांच साल के कार्यकाल में सत्ता का कोई फायदा नहीं मिला… फिर भी वो खड़ा है … मुस्तैद … संगठन के बिखराव से सबसे ज्यादा दुखी भी वही कार्यकर्ता है … सबसे ज्यादा नुकसान भी उसी का हुआ है … उसे पता है कि अगर अगली बार सरकार बन भी गई तो फिर से सत्ता के दलालों का कब्जा हो जाएगा … इसके बावजूद जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ता की कर्मठता और संगठन के प्रति आस्था नहीं डोल रही … उसे प्रदेश में भूपेश, सिंहदेव को सत्ता पर बैठाने की फिक्र भी है और देश में राहुल, खरगे की राजनीति चमकाने की चिंता भी … वो फिर से तैयार हो गया है … लोकसभा चुनाव के समर में जूझने के लिए …
खरगे, राहुल ने किया तलब
कांग्रेस ने 4 जनवरी को दिल्ली में बड़ी बैठक बुलाई है। बैठक में देश भर के सभी राज्यों के प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष शामिल होंगे। राष्ट्रीय पदाधिकारियों को भी बैठक में बुलाया गया है। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरग़े और राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं से चर्चा करेंगे। राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा को लेकर विस्तृत चर्चा के साथ ही लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भी मंथन होगा। बैठक में छत्तीसगढ़ से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत शामिल होंगे।
बड़ा सवाल ये है कि 4 जनवरी के बाद क्या छत्तीसगढ़ कांग्रेस कोमा से बाहर आ पाएगी ???
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