
द सीजी न्यूज
रविवार कोजनता कर्फ्यू के दौरान रेलवे स्टेशन पर अहमदाबाद सहित कई शहरों से लौटे मजदूरों व अन्य यात्रियों की सुध लेने वाला कोई नहीं था। न प्रशासन ने कोई व्यवस्था की, न थाली और ताली बजाने वालों ने फिक्र की। ऐसे कठिन दौर में शहर के चंद नौजवानों ने दूरदराज से आने वाले परेशानहाल मजदूरों की सुध ली। न सिर्फ दुर्ग शहर बल्कि देश-दुनिया को बताया कि मानवता किसे कहते हैं।
सीन 1 –
रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान कोरोना के संक्रमण से खुद बचने और दूसरो को बचाने की मुहिम में पूरा देश अपने घरों में कैद। होटल, चाय, नाश्ता के रेस्टॉरेंट, दुकानें बंद थी। बस सेवाएं पूरी तरह रोक दी गई थी।
सीन 2 – करीब 3 सौ लोग दुर्ग रेलवे पर भूखे प्यासे बैठे थे। ये सभी लोग मजदूर थे। मजदूरी करने दूसरे प्रदेशों में गए थे। कोरोना के कारण रोजी-रोटी बंद हुई तो अपने घर लौटने लगे। ट्रेन से दुर्ग रेलवे स्टेशन तक पहुंचे।
सीन 3 – दुर्ग में न भोजनालय खुले थे। न चाय नाश्ते की होटल। यात्री बस सेवा भी बंद। जीप-टैक्सी सेवा भी बंद। भूखे-प्यासे लोगों का जत्था परेशानहाल रहा। इन लोगों को कुछ भी नहीं सूझ रहा था।
ऐसी विषम परिस्थिति में …
दुर्ग शहर के चंद नौजवानों ने इंसानियत का जज्बा दिखाया। तकियापारा के मुस्लिम समाज के नौजवानों ने अपने घरों में भोजन तैयार कराया। भोजन लेकर रेलवे स्टेशन लौटे और भूखे-प्यासे मजदूरों की भूख मिटाई। इन नौजवानों ने बिस्कुट के पैकेट और पानी की व्यवस्था भी की। जनसमर्पण संस्था के बंटी शर्मा ने रेलवे स्टेशन परिसर में खुले में रहने वाले गरीबों के लिए अक्षय पात्र से भोजन तैयार कराया। रात 11 बजे तक भोजन की व्यवस्था करते रहे शहर के ये नौजवान।

तकियापारा के नौजवानों ने बताया कि उन्हें पता चला कि कोरोना संकट के कारण जनता कर्फ्यू के दौरान रेलवे स्टेशन पर कई परेशानहाल यात्री हैं। दोपहर से रात तक उन्होंने कई बार रेलवे स्टेशन जाकर पता किया कि किसी को भोजन या किसी और चीज की जरूरत तो नहीं है। जैसे-जैसे स्टेशन पर मजदूर पहुंचते रहे, वैसे-वैसे तकियापारा के घरों से भोजन इकट्ठा कर पैकेट तैयार होते रहे। रात में जब पता चला कि अभी ट्रेन से और ज्यादा लोग आ सकते हैं, तब रात 10 बजे 40 किलो पुलाव बनाने की व्यवस्था की गई। रात 12 बजे तक परेशान हाल यात्रियों के लिए भोजन का इंतजाम होता रहा।

इस दौरान रात में ही प्रशासनिक अफसरों को फोन किया गया ताकि बसों की व्यवस्था हो सके। बंटी शर्मा और समाजसेवी चतुर्भुज राठी ने सीएम हाउस में संपर्क करने का प्रयास किया। ताकि, मजदूरों को गांव तक पहुचाया जा सके। देर रात होने के कारण यह संभव नहीं हो पाया। समाजसेवा का जज्बा रखने वाले ये लोग रात साढ़े 12 बजे तक इन कोशिशों में लगातार जुटे रहे।

आज सुबह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास पर दोबारा फोन किया गया। बंटी ने मुख्यमंत्री को भी ट्वीट किया। सीएम हाउस से तत्काल प्रशासनिक अफसरों को निर्देश दिए गए। सीएम हाउस से फोन आते ही सुबह साढ़े 8 बजे प्रशासन ने आनन फानन में बसों की व्यवस्था की। 9 बजे इन मजदूरों को वापस उनके गांव रवाना किया गया। मुख्यमंत्री निवास से मदद मिलने के कारण इन मजदूरों को कवर्धा, साजा, गुंडरदेही, बेमेतरा, धमधा जैसे दूरदराज के इलाकों में पहुचाने की व्यवस्था हो सकी। बस आने से पहले बालोद, भानुप्रतापपुर और दल्लीराजहरा जाने वाले मजदूर खुद की व्यवस्था से जीप से रवाना हो गए।
आप सबको सलाम … दिल से ….
जिन्होंने भूखे-प्यासे मजदूरों की तकलीफ को समझा। उनके लिए भोजन की व्यवस्था की। मजदूरों को उनके गांव तक पहुंचाने के इंतजाम किए।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सलाम …. जिन्होंने ट्विटर पर खबर मिलते ही तत्काल जिला प्रशासन के अफसरों को निर्देश दिए और मजदूरों को उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था हो सकी।
मुस्लिम समाज के उन नौजवानों को सलाम … जिन्होंने तकियापारा के घर-घर जाकर भोजन इकट्ठा किया। रात में पुलाव तैयार कराया और स्टेशन पर भूख-प्यासे बैठे मजदूरों की भूख मिटाने का काम किया। बिस्कुट के पैकेट बांटे।
जन समर्पण संस्था के बंटी शर्मा और उनकी टीम को सलाम … बंटी और उनकी टीम पिछले कई महीनों से लगातार हर दिन दुर्ग शहर के रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड सहित अन्य स्थानों पर फुटपाथ पर जीवन जीने वाले गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं।
इंसानियत का जज्बा रखने वाले इन तमाम लोगों को दिल की गहराईयों से सलाम …
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