( विशेष लेख – मनीष सिंह की धारदार कलम से … )
द सीजी न्यूज
कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारा गया।
मारने वाली लड़की, सीआईएसएफ की जवान है।
वीडियो वायरल है। कह रही है-जब इसने बयान दिया, मेरी माँ वहाँ (आंदोलन स्थल) पर बैठी थी।
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कंगना ने बयान दिया था – आंदोलन में बैठी महिलाएं 100 रुपये लेकर धरने में बैठी है।
कंगना के साथ साथ भारतीय जनता पार्टी के नेता, उसके बुली समर्थंक और सोशल मीडिया हैंल्डल्स ने भी … किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और तीन काले कानून लौटाने की मांग कर रहे तमाम आंदोलन आंदोलनकारियों को तमाम गंदे कमेंट किये। नकली किसान बताया. खालिस्तानी और गद्दार कहा। देशद्रोही बताया। महिलाओं, औरतों पर भद्दे कमेंट्स किये।
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खुद प्रधानमंत्री ने आन्दोलनजीवी कहकर मजाक बनाया। इसका मतलब, आन्दोलन के धंधे से रोजी रोटी चलाना होता है।
कहने का सीधा मतलब – ये प्रोटेस्टर्स भाड़े पर भेजे गए, बिकाऊ लोग है। किसी से पैसा लेकर काम कर रहे है।
●● किसानों की आवाज को न मीडिया ने ध्वनि दी, न अखबारों ने।
सोशल मीडिया पर आवाज देने वाले पत्रकार, फेसबुक पेज, ट्विटर हैंडल और यू ट्यूब चैनल बन्द कराए गए, ट्रोल किये गए।
मनदीप पूनिया जैसे पत्रकार को जेल की यात्रा करनी पड़ी।
यह हालात कमोबेश हर आन्दोलन के साथ हुए। सीएए- एनआरसी पर आंदोलन हो, या छात्रों का आंदोलन, रोजगार के लिए लोग लड़ें या पेपर लीक के खिलाफ –
हर आन्दोलन को हेकड़ी, हिकारत औऱ क्रूरता से कुचला गया। प्रोटेस्टर्स और उसके समर्थन में बोलने वाले को मां- बहन की गालियां मिली।
आम इंसान की चमड़ी, नेताओ और ट्रोल्स की तरह मोटी नही होती। एक एक गाली उसे दिल पे लगती है। उसकी गांठ स्थिर रह जाती है।
अब इसका पे बैक टाइम है।
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जो हिसाब, सिर्फ चुनाव में आपका सूपड़ा साफ होने से बराबर नही होता।
ये तो बस, पहला चरण है, कि आपके सिर से व्यवस्था का कवच ढीला पड़े।
भाजपा के नेताओ और समर्थकों को अपनी सुरक्षा अधिक से अधिक बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने जितना नँगा नाच किया है, जितनो की मां बहनों को, उनकी देशभक्ति और गुड सेन्स को गाली दी है …
लोग पंजा खोलकर इंतजार कर रहे हैं।
सड़कों पर, दुकानों में, चौपाल में, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर, एयरपोर्ट में …
और उस चौराहे ओर जहां 50 दिन में मिलने का वादा था …
वहां कोई कुलजीत, सारा हिसाब एक थप्पड़ में चुकाने को इंतजार में है।
अपनी मां के सम्मान के लिए …
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इस तरीके से, हिंसा और क्रुद्धता से मेरी असहमति है। लेकिन इसे कुछ मिनट के लिए जप्त कर, मुझे कहने की इजाजत दीजिये।
इस स्वाभिमान, इस हिम्मत को सलाम। इस जवान की मां को मेरा सलाम,
कुलजीते… तेरे थप्पड़ को मेरा सलाम।
( इस विशेष लेख के लेखक मनीष सिंह अपने वृहद अध्ययन और क्रांतिकारी बेबाक राय के लिए मशहूर हैं। देश विदेश के इतिहास, भूगोल, अर्थव्यवस्था से लेकर राजनीतिक विषयों पर मनीष के लेख बेहद उद्वेलित करते हैं। समाज को जागरूक करने के साथ ही बड़ा संदेश देते हैं … सच ये है कि पढ़ने वाले की आत्मा को झिंझोड़कर रख देते हैं …)
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