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शिक्षा व्यवस्था के मामले मेें पटरी से उतरी भाजपा की डबल इंजन सरकार : वोरा

द सीजी न्यूज

दुर्ग। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। राज्य के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक न होने के कारण एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाएं लेने पर मजबूर है। पुस्तकों, स्टेशनरी, स्वच्छ पेयजल, शौचालयों की साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट न मिलने की शिकायतें भी मिल रही हैै।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व विधायक अरुण वोरा ने दुर्ग के झाड़ूराम देवांगन शासकीय विद्यालय और तितुरडीह क्षेत्र स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय परिसर का जायजा लिया और विद्यार्थियों से बातचीत की। दोनों स्कूलों में शिक्षकों की कमी का पता चला। एक-एक शिक्षक को  5 से 6 कक्षाएं लेना पड़ता है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इन विद्यालयों में 800 से 900 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन शिक्षकों और संसाधनों की कमी के कारण उनके शैक्षणिक भविष्य को लेकर चिंता शुरू हो गई है।

विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। स्वच्छ पेयजल की सुविधा का अभाव भी है। न नियमित जल आपूर्ति की व्यवस्था है और न ही वाटर कूलर उपलब्ध हैं, जिससे बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा बना रहता है।

तितुरडीह जैसे गरीब और श्रमिक बाहुल्य क्षेत्र में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल की स्थापना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा निजी स्कूलों की तर्ज पर निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि वर्तमान में इन स्कूलों की स्थिति को लेकर अव्यवस्था और उपेक्षा के आरोप लगाए जा रहे हैं।

वोरा ने कहा कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों की भारी कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और संसाधनों की किल्लत के बावजूद स्कूलों को पर्याप्त फंड और स्टाफ उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। यही स्थिति बनी रही तो बच्चों और शिक्षकों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।

वोरा ने यह भी कहा कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और सफल पहल रही है। इन स्कूलों के माध्यम से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों की तर्ज पर निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा मिली और कम समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। बच्चों के शैक्षणिक स्तर में सुधार हुआ और हजारों परिवारों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद मिली।

उन्होंने सवाल किया कि क्या वास्तव में शिक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, या फिर विकास की सूची में शिक्षा और शिक्षक दोनों को नजरअंदाज कर दिया गया है।

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