Breaking News

होटल मालिक को पीटने और बिना एफआईआर जेल भेजने पर हाईकोर्ट ने लगाया 1 लाख का जुर्माना

  • पुलिस ने होटल के रूम में ठहरे लोगों को बाहर निकाला

द सीजी न्यूज

भिलाई। कोहका के एक होटल में पुलिस द्वारा जबरदस्ती घुसकर जांच करने और होटल मालिक की पिटाई करने के साथ ही बिना एफआईआर दर्ज किये जेल भेजने के मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस पर एक लाख का जुर्माना ठोंका है। होटल मालिक आकाश साहू ने इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पुलिस के आचरण पर सख्त टिप्पणी की है।
दरअसल, पुलिस अधिकारी एक गुमशुदा लड़की की तलाश में होटल पहुंचे थे। पुलिस ने पहले मैनेजर से बदतमीजी की। फिर होटल के कमरे में घुसकर वहां मौजूद महिला-पुरुष को बाहर निकाल दिया। मना करने पर पुलिस ने होटल के मालिक आकाश साहू से मारपीट की और बिना एफआईआर जेल भेज दिया।
होटल मालिक आकाश लॉ स्टूड़ेंट हैं। इस मामले को लेकर आकाश ने हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए बताया कि होटल में रुके लोगों ने वैध दस्तावेज आधार कार्ड देकर रूम बुक कराया था। पुलिस कार्रवाई से पहले अनुमति लेने की बजाय पुलिस ने जबरदस्ती कार्रवाई की। हाईकोर्ट ने मालिक की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए पुलिस पर 1 लाख का जुर्माना लगाया है। सरकार को छूट दी है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों की सैलरी से पैसे वसूल किये जा सकते हैं।
आकाश ने याचिका में कहा कि वह स्वयं विधिवत पंजीकृत और लाइसेंस लेकर होटल चला रहा है। इसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई है। यह होटल उसकी आय का एकमात्र जरिया है। होटल संचालक ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी और जवान उनके होटल में पहुंचे। होटल में ठहरे लोगों से पूछताछ करने का बहाना बनाकर रजिस्टर और पहचान दस्तावेजों की जांच की।
इसके बाद महिला पुलिस बल के बिना एक कमरे में जबरदस्ती घुस गए। कमरे में पुरूष और महिला ठहरे थे। उन्हें कमरे से बाहर लाया गया। इस दौरान मैनेजर के साथ भी पुलिस ने दुव्र्यवहार करते हुए पिटाई कर दी। पुलिस ने बेवजह धमकी भी दी। कुछ समय बाद पुलिस अफसर और जवान दोबारा होटल पहुंचे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस के दुव्र्यवहार की जानकारी मिलने पर वह होटल पहुंचा। पुलिस अफसरों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए दुव्र्यवहार किया और अपमानित करने लगे। विरोध करने पर उसे जबरन हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। यहां उसके साथ मारपीट कर अभद्रता की गई। बाद में बिना किसी वैध कारण के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस अफसरों का कहना था कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस एक गुमशुदा लड़की की तलाश में उनके होटल पहुंची थी। कमरों की तलाशी ली गई। पुलिस ने दावा किया कि आकाश ने सरकारी काम में बाधा डालने का काम किया। पुलिस वाहन की चाबी छीन ली और ड्राइवर के साथ हाथापाई की, जिससे शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया था। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में ले लिया और बाद में जेल भेज दिया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी संज्ञेय अपराध के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। केवल संदेह और कहासुनी के आधार पर जेल भेजना असंवैधानिक है। हिरासत में दिया गया मानसिक तनाव और अपमान मानवीय गरिमा को नष्ट करता है। गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित में कारण बताना अनिवार्य है। आकाश ने गिरफ्तारी मेमो पर खुद लिखा था कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस के साथ ही सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। मजिस्ट्रेट को न्यायिक प्रहरी होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने बिना दिमाग लगाए पुलिस की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी और युवक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ  शुरू की गई सभी आपराधिक कार्रवाई और पुलिस के इस्तगासा को निरस्त कर दिया। राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि 4 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को 1 लाख रुपए का भुगतान करे।
सरकार को यह छूट दी गई है कि यह राशि जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूल सकती है। भुगतान में देरी होने पर राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि पुलिस अधिकारियों के अवैध कार्य, गैर कानूनी रिमांड और पुलिस अत्याचार से आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को कमजोर करते हैं।
राज्य सरकार को पुलिस कर्मियों को मानवाधिकारों के बारे में संवेदनशील बनाने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए। हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को यह सुनिश्चित करने कहा है कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रिपीट न हो।

Check Also

टाउनशिपवासी बोले – डॉयलागबाजी की बजाय केंद्रीय इस्पात मंत्री या बीएसपी प्रबंधन से करें सार्थक चर्चा करें … बलिदान देने की बयानबाजी बेतुकी …

द सीजी न्यूज लीज, रिटेंशन और लाइसेंसधारकों को बीएसपी प्रबंधन की नोटिस मिलने के मुद्दे …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!