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जिम्मेदारियों भरी यात्रा की नई शुरूआत है दीक्षांत समारोह – राज्यपाल डेका

– छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पशुपालन डेयरी और मत्स्य पालन की भूमिका महत्वपूर्ण – कृषि मंत्री नेताम
– कामधेनु विवि के दीक्षांत समारोह में 45 छात्रों को मिला विश्वविद्यालय गोल्ड मेडल
– 1536 छात्रों को प्रदान की गई स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी उपाधि
– 8 स्नातक उपाधि धारकों को पंडित तीरथ प्रसाद मिश्रा मेमोरियल गोल्ड मेडल
दुर्ग/ दाऊ वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने 1536 छात्रों को पशु चिकित्सा एवं पशुपालन, दुग्ध प्रौद्योगिकी एवं मात्स्यिकी संकाय में स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी उपाधि प्रदान की। 45 उपाधि धारकों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक और पशुचिकित्सा व पशुपालन में 8 स्नातक उपाधि धारकों को पंडित तीरथ प्रसाद मिश्रा मेमोरियल स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल डेका ने अपने करकमलों से विद्यार्थियों को उपाधि पत्रक व स्वर्ण पदक प्रदान किया। समारोह में प्रदेश के पशुधन विकास, मछली पालन, कृषि विकास एवं किसान कल्याण एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। छ.ग. राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चन्द्राकर और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, अहिवारा विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा भी मौजूद थे।
इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल पढ़ाई पूरी होने का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक नई जिम्मेदारियों भरी यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा किसी एक दिन समाप्त नहीं होती और सीखने की प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और यह क्षेत्र ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं और छोटे किसानों की आय का प्रमुख साधन है। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन क्षेत्र को केवल संख्या बढ़ाने के बजाय आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से मजबूत करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल डेका ने विश्वविद्यालय द्वारा संक्रामक रोगों की रोकथाम और नस्ल सुधार के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने डेयरी प्रौद्योगिकी के छात्रों को मिलावट की समस्या के प्रति सचेत करते हुए गुणवत्ता पर ध्यान देने कहा, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद बन सकें। राज्यपाल ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में उन्होंने कांकेर जिले की सफलता से प्रेरणा लेने और आधुनिक तरीकों को अपनाने की बातें कही। राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी ढूंढने वाले न बनें, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ रोजगार देने वाले बनें।
प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की भूमिका महत्वपूर्ण है। डिग्री पाने के बाद युवा ज्ञान, प्रयोग, नवाचार और समाज सेवा के साथ आगे बढ़ते हैं। उपाधि प्राप्त करने के बाद डिग्री धारक युवाओं के कौशल, अनुसंधान और प्रतिबद्धता से किसानों, पशुपालकों और मछुवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। राज्य सरकार युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहायता दे रही है। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहन, अनुदान और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी शाह ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बीपी राठिया ने समारोह का संचालन किया। इस अवसर पर निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. जीके दत्ता, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. मंजू राय, अधिष्ठाता पशु चिकित्सा महाविद्यालय अंजोरा डॉ. संजय साक्य, अधिष्ठाता मात्स्यिकी महाविद्यालय कवर्धा डॉ. एमके गेेंदले, अधिष्ठाता दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर डॉ. सुधीर उपरीत, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रवि आर सक्सेना सहित विश्वविद्यालय के उपाधिधारित विद्यार्थी व उनके अभिभावक उपस्थित थे।

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