
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
पंजाब में ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से छत्तीसगढ़ में छाया राजनीति कुहांसा पूरी तरह साफ हो गया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि यहां भी देर सबेर फेरबदल होगा। लेकिन दिल्ली की राजनीति से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने का फैसला काफी सोच समझकर लिया है। अगले साल पंजाब सहित पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने अनुसूचित जाति वर्ग से चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर देश की राजनीति को स्पष्ट संकेत दिया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग को महत्वपूर्ण ओहदा और प्रतिनिधित्व देने वाली एकमात्र पार्टी कांग्रेस है।
इस बदलाव के साथ ही तय हो गया है कि छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार को कोई खतरा नहीं है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बदलाव की संभावना खत्म हो गई हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। अब पंजाब में फेरबदल करते हुए कांग्रेस हाईकमान ने अनुसूचित जाति वर्ग से चन्नी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है। कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कांग्रेस पार्टी ही पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की सच्ची हितैषी है।
कांग्रेस ने यह कदम पंजाब, यूपी सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उठाया है। पार्टी हाईकमान ने संकेत दिये हैं कि आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी हमेशा आगे रही है और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री जैसे पद पर इन वर्गों से जुड़े लोगों को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया है। ऐसे राजनीतिक हालात में छत्तीसगढ़ में पिछड़े वर्ग का बड़ा चेहरा कहे जाने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हटाने की अटकलें पूरी तरह बेतुकी कही जा रही है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का ताजा बयान भी काफी महत्वपूर्ण है। सुरजेवाला ने कहा है कि “ पंजाब में अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। ढाई साल पहले कांग्रेस ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री बनाया। दोनों राज्यों में चल रही कांग्रेस सरकारों का कामकाज काफी अच्छा है। चन्नी के नेतृत्व में पंजाब में भी अच्छी सरकार काम करेगी।”
राहुल के बेहद करीबी कहे जाने वाले सुरजेवाला के इस बयान से शीशे की तरह साफ हो गया है कि अच्छा काम करने वाले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को बदला नहीं जाएगा। भूपेश सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टीएस बाबा के दिल्ली रवाना होते ही अखबारों और न्यूज चैनलों के साथ वेबसाइट-पोर्टल में सीएम बदलने की खबरें अब पूरी तरह बेमानी हो चुकी हैं।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री न बदले जाने की कई महत्वपूर्ण वजह हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अखिल भारतीय स्तर पर पिछड़े वर्ग का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि भूपेश बघेल की छवि देश भर के किसानों के बीच कृषक हितैषी राजनेता के रूप में बन चुकी है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, हरियाणा, पंजाब सहित कई प्रदेशों में किसान संगठनों द्वारा वहां की राज्य सरकारों को बाकायदा ज्ञापन देकर यह मांग की गई है कि छत्तीसगढ़ सरकार की तरह किसान हितैषी योजनाएं लागू की जाएं। भूपेश की यह छवि रातोंरात नहीं गढ़ी गई है बल्कि भूपेश ने अपने फैसलों से किसानों का विश्वास जीता है। यह सिलसिला थमा नहीं है।
दूसरी ओर, पंजाब में बदलाव के जरिये कांग्रेस हाईकमान के अनुसूचित जाति वर्ग से सीएम बनाने के फैसले से भाजपा कैंप में दहशत है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला के बयान से पंजाब के साथ ही यूपी की राजनीति में असर पड़ने की आहट मिल रही है। भाजपा नेताओं को डर है कि कांग्रेस के ओबीसी-एससी-एसटी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के संदेश से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लग सकता है।
बहरहाल, छत्तीसगढ़ की बात करें तो यह तय हो चुका है कि दिल्ली के राजनीतिक सूत्रों के अनुसार किसान हितैषी योजनाएं लागू कर पूरे देश में सुर्खियां बटोरने वाले किसान पुत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हटाना कांग्रेस के लिये किसी भी तरह फायदेमंद साबित नहीं होगा, बल्कि इससे पार्टी को काफी नुकसान होगा। पिछड़े वर्ग के साथ-साथ किसानों के बीच इसका गलत संदेश जाएगा। ढाई साल के कार्यकाल में किसानों, मजदूरों, महिलाओं, आदिवासियों समेत हर वर्ग के उत्थान के लिये भूपेश सरकार ने एक से एक योजनाएं लागू की हैं। ये योजनाएं देशभर में नजीर बन चुकी हैं। ऐसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री को भला कौन हटाएगा?
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