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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश की जनता के नाम अपने संदेश के दौरान प्रदेशवासियों को कई ऐतिहासिक सौगातें दी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण के सिलसिले को और बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ में जिलों का पुनर्गठन करते हुए चार नये जिले ‘मोहला-मानपुर’, ‘सक्ती’, ‘सारंगढ़-बिलाईगढ़’ और ‘मनेन्द्रगढ़’ के गठन की ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने राज्य में 18 नई तहसीलों के गठन का भी ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर निवासरत लोगों को उनकी काबिज जमीन का हक दिलाने के लिए ‘स्वामित्व योजना’ शुरू करने की भी घोषणा की।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने राज्य में राजस्व संबंधी कामकाज की जटिलता से राहत दिलाने के लिए नामांतरण की प्रक्रिया को सरल करने, सभी जिला मुख्यालयों और नगर-निगमों में महिलाओं के लिए मिनीमाता उद्यान विकसित करने और प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए आयु-सीमा का बंधन समाप्त करने की घोषणा की। प्रदेश की जनता को रियायती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए नगरीय क्षेत्रों में लागू ‘मुख्यमंत्री सस्ती दवा योजना’ अब ‘श्री धन्वन्तरी योजना’ के नाम से जानी जाएगी। उन्होंने बिजली कंपनियों में विभिन्न पदों पर 2500 से अधिक कर्मियों की भर्ती और ‘डायल 112’ सेवा की उपयोगिता को देखते हुए इसका विस्तार पूरे प्रदेश में करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि में काबिज लोगों को हक दिलाने के लिए राज्य में स्वामित्व योजना शुरू करने की घोषणा की।
अमर शहीदों का पुण्य स्मरण किया
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भारत ने दो शताब्दी से अधिक समय तक अंग्रेजों की प्रताड़ना और उनका शासन सहा है। गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए हजारों सपूतों और सुपुत्रियों ने अपना सर्वस्व त्याग किया। उन सबके त्याग के बारे में सोचकर आंखें नम हो जाती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ ही एक के बाद एक हजारों चेहरे नजरों के सामने आते हैं। अमर शहीद गैंदसिंह, वीर नारायण सिंह, मंगल पाण्डे, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मी बाई, वीरांगना अवंति बाई लोधी, लाल-बाल-पाल, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुुल कलाम आजाद जैसे नामों का एक कारवां बनता चला जाता है।
छत्तीसगढ़ महतारी के सपूतों का स्मरण
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि छत्तीसगढ़ के वीर गुण्डाधूर, पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, डॉ. खूबचंद बघेल, पं. सुंदरलाल शर्मा, डॉ. ई.राघवेन्द्र राव, क्रांतिकुमार, बैरिस्टर छेदीलाल, लोचन प्रसाद पाण्डेय, यतियतन लाल, मिनीमाता, डॉ. राधाबाई, पं. वामनराव लाखे, महंत लक्ष्मीनारायण दास, अनंतराम बर्छिहा, मौलाना अब्दुल रऊफ खान, हनुमान सिंह, रोहिणी बाई परगनिहा, केकती बाई बघेल, बेला बाई जैसे अनेक क्रांतिवीरों और मनीषियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
शहादत को नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सामाजिक सौहार्द्र, नागरिकों के बीच एकता और देश की अखण्डता को बचाए रखने के लिए भी अनेक सपूतों ने कुर्बानी दी। उत्तरप्रदेश में गणेश शंकर विद्यार्थी शहीद हुए, उन्हीं मूल्यों और सिद्धांतों के लिए महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी शहीद हुए। शहादत की यह परंपरा हर प्रदेश में ऐसी हस्तियों की यादें समाई हुई हैं। देश की सीमाओं की चौकसी करने वाले सैनिकों और देश के भीतर सुरक्षा बलों में काम कर रहे लाखों जवानों की मौजूदगी से हम सुरक्षित महसूस करते हैं।
राज्य में संतुलित विकास का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद यह सुअवसर मिला था कि राज्य के हर हिस्से में विकास के असंतुलन को समाप्त किया जाए, लेकिन विडम्बना है कि इस दिशा में सही सोच के साथ सही प्रयास नहीं किए गए। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से तेजी से विकास किया जा सकता है, जिससे गांवों और शहरों के बीच की गहरी खाई को पाटा जा सके। वन अधिकार अधिमान्यता पत्र वितरण से आदिवासी और परंपरागत वन निवासी समुदायों को जमीन का अधिकार मिल सकता था, वह भी सही ढंग से नहीं दिया गया। हमने न्याय की शुरुआत इसी मुद्दे से की थी। मात्र पौने तीन वर्षों में निरस्त दावों की समीक्षा करके बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र के साथ 44 हजार से अधिक सामुदायिक और 2 हजार 500 से अधिक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र दिए हैं। लोहंडीगुड़ा के बाद स्थानीय लोगों को अपनी जमीन का हक दिलाने की यह एक बड़ी मिसाल है। वन अधिकार की जमीनों पर धान उपजाने या वृक्ष लगाने वाले लोगों को भी ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ और ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ से जोड़ा गया है।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन योजना, ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, ‘राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं से बड़े वर्ग को सीधा लाभ मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर निवासरत लोगों को उनकी काबिज जमीन का हक दिलाने के लिए ‘स्वामित्व योजना’ शुरू की जाएगी। भूमि स्वामित्व का अभिलेख मिलने पर बड़ी संख्या में लोग बैंकों से आवासीय ऋण तथा अन्य सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे। हर वर्ग के लोगों का अपनी जमीन, अपना मकान और अपने सिर पर छांव का सपना जल्दी पूरा करने के लिए हमारी सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। छोटे भू-खण्डों की खरीदी-बिक्री और पंजीयन पर पूर्व में लगाई गई रोक एक तरह का अन्याय ही था, जिसे दूर करने के लिए निर्णय लिया गया। राजस्व संबंधी कामकाज की जटिलता से जनता को राहत दिलाने के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समस्त जिला मुख्यालयों और नगर-निगमों में एक उद्यान सिर्फ महिलाओं के लिए विकसित किया जाएगा, जो ‘मिनीमाता उद्यान’ के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश के महाविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयु-सीमा का बंधन है। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने वाले युवाओं के हित में आयु-सीमा के इस बंधन को समाप्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा क मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना’, ‘मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना’, ‘दाई-दीदी क्लीनिक’ जैसे नवाचारों का लाभ लाखों लोगों को मिला है। ‘डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना’ और ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ देश की सबसे बड़ी आर्थिक मददगार योजना सिद्ध हुई है। डॉक्टरों और अन्य सुविधाओं की कमी दूर करने हेतु प्राथमिकता से कदम उठाए हैं, जिसके कारण ढाई वर्षों के अल्प समय में ही स्नातक चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और दंत चिकित्सकों की संख्या 1 हजार 378 से बढ़कर 3 हजार 358 पहुंच गई। प्रदेश की जनता को रियायती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए ‘मुख्यमंत्री सस्ती दवा योजना’ नगरीय क्षेत्रों में लागू है। अब यह ‘श्री धन्वन्तरी योजना’ के नाम से जानी जाएगी।बड़ा लक्ष्य हमने रखा है और इसके प्रथम चरण का कार्य भी प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में भी अधूरी पड़ी योजनाओं के कारण बहुत बड़ा निवेश जनहित में उपयोग नहीं हो पा रहा था और परियोजनाएं ठप्प पड़ी थीं। ‘हाफ बिजली बिल योजना’ का लाभ 39 लाख 63 हजार लोगों को 1 हजार 822 करोड़ रुपए की बचत के रूप में मिला है। निःशुल्क बिजली प्रदाय योजना का लाभ 6 लाख किसानों और 18 लाख बी.पी.एल. उपभोक्ताओं को मिला है। बिजली कंपनियों में विभिन्न पदों पर 2 हजार 500 से अधिक कर्मियों की भर्ती की जा रही है, जिसमें जूनियर इंजीनियर से लेकर मैदानी स्तर पर काम करने वाले लाइन अटेंडेंट के पद शामिल हैं। इसमें से 1 हजार 500 लाइन अटेंडेंट पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। शेष पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है, शीघ्र ही उसके लिए भी विज्ञापन जारी किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, पेयजल योजना, सिंचाई योजनाओं सहित अन्य विकास योजनाओं विस्तार से जिक्र करते हुए नए उद्योगों की जानकारी दी। बघेल ने कहा कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 हजार 492 करोड़ रुपए के पूंजी निवेश से 1 हजार 145 नए उद्योग स्थापित हुए हैं और 28 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। वृहद उद्योगों में 51 हजार करोड़ रुपए से अधिक पूंजी निवेश करने के लिए बडे़ महत्वपूर्ण एमओयू भी हुए हैं, जिनमें लगभग 72 हजार स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलना प्रस्तावित है।
डायल 112 अब पूरे प्रदेश में
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ‘डायल 112’ सेवा की उपयोगिता को देखते हुए इसका विस्तार अब पूरे प्रदेश में किया जाएगा। पुलिस बल को तनाव मुक्त रखने और जन-सरोकारों के लिए अधिक जागरूक करने हेतु कई कदम उठाए गए हैं जैसे-संकट निधि, स्पंदन, शहीद सम्मान निधि, मेरिट स्कॉलरशिप, थानों में संवेदना कक्ष, बाल मित्र कक्ष, महिला हेल्प डेस्क, राज्य साइबर थाना आदि। शांति, अहिंसा और साम्प्रदायिक सद्भाव की बुनियाद को कमजोर करने वाली ताकतों का पोषण कहां से होता है, यह बात समझना भी हमारी आजादी के मूल्यों को समझने के समान होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ मॉडल से देश में विकास की नई अवधारणा विकसित हो रही है, समरसता और भागीदारी के साथ विकास का नया वातावरण बन रहा है, उससे न सिर्फ छत्तीसगढ़ के प्रति देश का विश्वास मजबूत होगा। छत्तीसगढ़ न सिर्फ देश और दुनिया के लिए नई आशाओं का गढ़ बनेगा बल्कि इसका लाभ भारत को अपनी विरासत, मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ाने में भी मिलेगा। छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय गौरव के केन्द्र के रूप में सम्मानित होगा। हम ऐसा ही ‘नवा छत्तीसगढ़’ गढ़ने को प्रतिबद्ध हैं।
समारोह में छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष किरणमयी नायक, छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एम.आर.निषाद, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष राजकुमारी दीवान, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक डी.एम.अवस्थी सहित अन्य गणमान्य नागरिक, अधिकारीगण उपस्थित थे।
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