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पीडब्लूडी मंत्री की स्पीच पर कांग्रेस नेता की टिप्पणी : लोग दिन भर चुटकियां लेते रहे

द सीजी न्यूज

कार्यक्रम में इंजीनियरों को सम्मानित करते हुए जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे

दुर्ग/ गुरुवार को इंजीनियर्स डे कार्यक्रम के मौके पर दुर्ग में जल संसाधन विभाग कार्यालय के सामने भारत रत्न स्वर्गीय सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या की मूर्ति का अनावरण किया गया। इस मौके पर पीडब्लूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू और जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे भी उपस्थित रहे। इस दौरान पीडब्लूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू की स्पीच की आज दिन भर चर्चा होती रही। खास तौर पर राजनीतिक हलकों में ताम्रध्वज साहू के नवाचार वाले बयान पर लोग चुटीले व्यंग्य करते रहे।

दरअसल, पीडब्लूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे इंजीनियर बहुत प्रतिभाशाली हैं। हमारे अभियंताओं को दुर्ग शहर में भी ऐसा कुछ मॉडल वर्क तैयार करना चाहिए, जिससे दुर्ग शहर को भी इंजीनियरिंग के किसी नवाचार के लिए याद किया जाए।

पीडब्लूडी मंत्री से चिढ़े बैठे एक कांग्रेस नेता ने इस पर जमकर चुटकी लेते हुए सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी पोस्ट की। दुर्ग में पीडब्लूडी के इंजीनियरों ने नवाचार तो पहले ही कर ही दिया है। जीई रोड के किनारे बनी टेढ़़ी-मेढ़ी नालियों का जाल बिछाकर बहुत बड़ा नवाचार किया जा चुका है। अब और कौन सा नवाचार चाहते हैं मंत्री जी।

सोशल मीडिया में भेजी गई इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेता ने इसे बाद में डिलीट कर दिया। हालांकि इसे लेकर कांग्रेस-भाजपा नेताओं के अलावा इंजीनियर भी दिन भर चुटकी लेते रहे।  

गौरतलब है कि दुर्ग में 64 करोड़ की लागत से जीई रोड के उन्नयन और सौंदर्यीकरण का कार्य हो रहा है। इसी के तहत जीई रोड के किनारे नालियां भी बनाई गई हैं। कांट्रैक्टर ने दुर्ग में मेनोनाइट चर्च के आसपास सबसे ज्यादा जिग जैग, सर्पाकार और कई तरह की डिजाइनर नालियों का निर्माण कर दिया है। इसे लेकर काफी हो हल्ला मचा था। अब पीडब्लूडी मंत्री के नवाचार की स्पीच पर वही टेढ़ी-मेढ़ी नालियां फिर से चर्चा का विषय बन गई हैं।     

सर विश्वेश्वररैया ने असंभव को संभव कर दिखाया था – चौबे 

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि स्व. विश्वेश्वरैया का योगदान न केवल देश के लिए अहम है, बल्कि उन्होंने भारतीय प्रतिभा की धाक दुनिया भर में जमाई। जिस समय कावेरी नदी में कृष्णराज सागर बांध बनना था और अंग्रेज विशेषज्ञों ने कह दिया था कि यह बांध नहीं बन पाएगा। तब सर विश्वेश्वररैया ने यह चुनौती स्वीकार की और बांध का निर्माण कर दिखाया, जो इंजीनियरिंग का अपने समय का अद्भुत नमूना था।

चौबे ने कहा कि जब हम अपनी जल संसाधन संरचनाओं को देखते हैं जो 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं, तो हमें लगता है कि कितनी मजबूती से हमारे इंजीनियर्स ने इन्हें बनाया होगा और तब हमें अपने अभियंताओं के ऊपर गर्व और भी बढ़ जाता है। ऐसा लगता है कि यह संरचनाएं अगले 100 साल तक और चलेंगी। उन्होंने सर विश्वेश्वररेया की मूर्ति निर्माण की पहल के लिए जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता सुरेश पांडे  की प्रशंशा भी की। इस मौके पर विधायक अरुण वोरा ने भी इंजीनियर्स डे की बधाई अभियंताओं को दी। महापौर धीरज बाकलीवाल ने भी इंजीनियर्स डे पर जिले के अभियंताओं को बधाई दी।

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