द सीजी न्यूज
भाजपा के कद्दावर आदिवासी नेता नंद कुमार साय ने 29 अप्रैल को फेसबुक पर एक वीडियो जारी करते हुए बयान दिया है जिसके बाद पूरे प्रदेश की भाजपाई राजनीति में तूफान मच गया है। भाजपा नेता साय ने अपने फेसबुक वॉल पर जारी वीडियो में 2011 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह और जशपुर जिले के भाजपा नेताओं की राजनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
साय ने मंगलवार को बगीचा क्षेत्र के भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेता गेंद बिहारी साय के साथ एसडीओपी द्वारा मारपीट किए जाने के बाद गरमाई राजनीति पर कहा कि पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीओपी को लाइनअटैच कर दिया। दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बावजूद भाजपा राजनीति करती रही। बिना सोचे समझे सरगुजा बंद का आह्वान कर दिया गया, जो कि पूरी तरह विफल रहा ।
उन्होंने आगे कहा – 2011 में छत्तीसगढ़ भाजपा के सबसे बड़े नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव की सभा से उनके दत्तक पुत्र प्रदीप नारायण दीवान को जबरदस्ती उठा लिया था और उन्हें थाना ले गए थे। तब स्व. जूदेव ने इस घटना को प्रशासनिक आतंकवाद करार दिया था। उनके इस बयान के बावजूद ना तो पुलिस के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई, ना ही किन्ही भाजपा नेता ने इसके लिए कोई आंदोलन किया। 2011 में स्व दिलीप सिंह जूदेव की सभा से प्रदीप नारायण को पुलिस द्वारा उठवाकर थाने ले जाने का एकमात्र उद्देश्य स्व. जूदेव को नीचा दिखाना था।उनकी बेइज्जती करना था।
साय ने कहा कि स्व जूदेव की सभा में जो हुआ, वह भी प्रशासनिक आतंकवाद ही था, क्योंकि स्व जूदेव ने खुद यह बात कही थी। फिर उस प्रशासनिक आतंकवाद के खिलाफ आंदोलन क्यों नहीं हुआ ? 2011 के प्रशासनिक आतंकवाद और आज के प्रशासनिक आतंकवाद में इतना बड़ा अंतर कैसे हो गया, यह सब समझ से परे है। गौरतलब है कि 2011 में प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह हुआ करते थे।
साय ने अपने फेसबुक वाल पर रमन सरकार के कार्यकाल में हुए वाकये का जिक्र करते हुए बता दिया है कि उस समय तो पुलिस के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हुई जबकि भूपेश सरकार ने एसडीओपी को लाइन अटैच कर दो पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। जाहिर तौर पर साय यह कह रहे हैं कि रमन सरकार के कार्यकाल में प्रशासनिक आतंकवाद चरम पर था। भाजपा की सरकार ने भाजपा के कद्दावर नेता स्व. जूदेव की सभा से उनके कट्टर समर्थक को उठवा लिया था और तब पुलिस के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं की गई। जाहिर है, कि साय ने वीडियो जारी कर न सिर्फ रमन सिंह बल्कि भाजपा की सियासत में गुटबाजी को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं। साय के बयान से सूबे की सियासत में भूचाल तो आ ही गया है।
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