द सीजी न्यूज
दुर्ग। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने केंद्र सरकार के बजट में सहकारिता क्षेत्र के लिये कई सौगातें मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया है। बेलचंदन ने कहा कि केन्द्रीय बजट में सहकारी संस्थाओं को कृषि, ग्रामीण विकास और किसान कल्याण की केन्द्रीय व महत्वपूर्ण संस्थाओं के रूप में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में सहकारिता क्षेत्र को विशेष रूप से शामिल करते हुए उसकी भूमिका और महत्व को रेखांकित किया है।
बेलचंदन ने कहा कि प्राथमिक सहकारी समितियों को आयकर में कटौती की सुविधा देना महत्वपूर्ण सुधार है। कपास की खेती और डेयरी गतिविधियों के क्षेत्र में कटौती की अनुमति देकर सरकार ने प्राथमिक सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है। सहकारी गतिविधियों का लाभ बेहतर कीमतों, बेहतर सेवाओं और मजबूत संस्थानों के रूप में सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि संघीय सहकारी समिति को पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समिति को लाभ और आय में कटौती वर्तमान में प्राथमिक सहकारी समिति को, लाभ व आय में कटौती की सुविधा उपलब्ध है। प्रस्ताव है कि इस कटौती का विस्तार करते हुए उन प्राथमिक सहकारी समितियों को भी शामिल किया जाए जो पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति संघीय सहकारी समिति, सरकारी संगठनों आदि को करती है।
बेलचंदन ने कहा कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम 2002 के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी समितियों को सहकारी समिति की परिभाषा में शामिल किया गया है। नई कर व्यवस्था के तहत अंतर सहकारी समिति लाभांश आय को कटौती के रूप में अनुमति दी गई है। मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम 2002 के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी समितियों को भी आयकर अधिनियम के अंतर्गत सहकारी समिति की परिभाषा में शामिल करने का प्रस्ताव है। यह संशोधन 1 अप्रेल 2026 से प्रभावी होगा और यह कर वर्ष 2026-27 व उसके बाद के वर्षो पर लागू होगा।
इसी तरह बजट में एक और महत्वपूर्ण सुधार किया गया है। नई कर व्यवस्था के अंतर्गत सहकारी समितियों को अन्य सहकारी समितियों से प्राप्त लाभांश पर भी कर में कटौती की अनुमति दी गई है। यह लाभांश आगे अपने सदस्यों को वितरित किया जाएगा। यह प्रावधान अत्यंत न्यायसंगत है, क्योंकि इससे सहकारी संरचना में दोहरी कराधान की समस्या समाप्त होगी। इस सुधार से सहकारी समितियों को अपनी आय अपने सदस्यों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
बेलचंदन ने कहा कि समग्र रूप से यह बजट एक सशक्त संदेश देता है कि सहकारिताओं का महत्व, अत्यधिक बढ़ गया है और अब इसे नीति स्तर पर पूरी तरह स्वीकार किया गया है। स्पष्ट कानूनी मान्यता, निष्पक्ष कर व्यवस्था और लक्षित प्रोत्साहन अधिक से अधिक सहकारी समितियों को आगे आने, अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार करने और पूरे देष में अधिक व्यवसाय करने के लिए प्रेरित करेंगे। इससे सहकारी आन्दोलन मजबूत होगा और सामान्य किसान समुदाय का समग्र उत्थान सुनिश्चित होगा।
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